Uttarakhand: उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह में रचनाकारों का महाकुंभ प्रदेश में स्थापित होंगे दो आधुनिक साहित्य ग्राम

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025’ में शिरकत की। उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान’ से डॉक्टर जितेन ठाकुर को नवाजा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।

समारोह के दौरान साहित्य के क्षेत्र में दीर्घकालीन और उत्कृष्ट योगदान देने के लिए डॉक्टर बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉक्टर प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय और अताए साबिर अफजल मंगलौरी को ‘दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने महिला साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘साहित्य नारी वंदन सम्मान’ के अंतर्गत प्रोफेसर दिवा भट्ट को पुरस्कृत किया। इसके अतिरिक्त बाल साहित्य में प्रोफेसर दिनेश चमोला और मौलिक रचना श्रेणी में डॉक्टर भूपेंद्र बिष्ट, डॉक्टर सुधा जुगरान व शीशपाल गुसाई को सम्मानित किया गया। लोक भाषाओं के संरक्षण की दिशा में कुमाऊंनी और गढ़वाली साहित्य के लिए तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल को सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में ‘युवा कलमकार प्रतियोगिता’ के विजेताओं को भी पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में साहित्यकारों को समाज का सच्चा मार्गदर्शक और प्रेरक बताया। उन्होंने कहा कि लेखक केवल शब्दों के शिल्पकार नहीं होते, बल्कि वे अपनी लेखनी से समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और उत्तराखंड राज्य निर्माण के आंदोलन में रचनाकारों की ऐतिहासिक भूमिका का स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से राज्य में दो आधुनिक ‘साहित्य ग्राम’ स्थापित किए जाएंगे। इन ग्रामों में साहित्यकारों को लेखन और सृजन के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

धामी सरकार स्थानीय बोलियों और लोक साहित्य के संरक्षण के लिए पूरी तरह संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई पीढ़ी को साहित्य के प्रति आकर्षित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और विभिन्न साहित्यिक प्रतियोगिताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार लेखकों को उनके ग्रंथ प्रकाशन के लिए अनुदान सहायता भी प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’ और शैलेश मटियानी जैसे महान साहित्यकारों की विरासत को संजोना हम सभी का दायित्व है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरा देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। इसी प्रेरणा से उत्तराखंड की बिखरी हुई साहित्यिक धरोहर को संकलित और संरक्षित करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। उन्होंने साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे अपनी कृतियों के माध्यम से देवभूमि की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाएं। इस गरिमामय समारोह में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, खजान दास और विधायक सविता कपूर सहित बड़ी संख्या में विद्वान, लेखक और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

 

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