Himachal: हिमाचल प्रदेश के शीर्ष अधिकारी पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप

शिमला। हिमाचल प्रदेश में एक शीर्ष सरकारी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। अधिवक्ता विनय शर्मा ने इस संबंध में छोटा शिमला पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उक्त अधिकारी ने पंजाब के खरड़ में लगभग 3.18 एकड़ भूमि खरीदी है। विशेष बात यह है कि अधिकारी ने स्वयं अप्रैल माह में दाखिल अपने वर्ष 2025-2026 के वार्षिक संपत्ति विवरण में इस भूमि की खरीद कीमत करीब 1.38 करोड़ रुपये घोषित की थी।

शिकायतकर्ता विनय शर्मा का दावा है कि खरड़ में खरीदी गई इस भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य किसी भी स्थिति में 25 करोड़ रुपये से कम नहीं है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस उच्च स्तरीय भूमि सौदे के लिए सरकारी नियमों के तहत आवश्यक पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, जबकि इस लेनदेन का विवरण वार्षिक संपत्ति रिटर्न में दर्ज किया गया है।

अधिकारी पर यह भी आरोप लगाया गया है कि इस भूमि की खरीद के लिए उपयोग की गई भारी-भरकम राशि ‘चेस्टर हिल’ प्रोजेक्ट से जुड़ी हो सकती है। अधिवक्ता का कहना है कि यह धनराशि संभवतः चेस्टर हिल परियोजना के विरुद्ध होने वाली कानूनी कार्रवाई को रुकवाने के बदले में रिश्वत के तौर पर प्राप्त की गई होगी। विनय शर्मा ने इस पूरे मामले में धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने की मांग की है। उनके अनुसार, चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 प्रोजेक्ट्स से जुड़े बेनामी भूमि सौदों में कई सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत होने की प्रबल संभावना है।

यह मामला मुख्य रूप से सोलन जिले से जुड़ा हुआ है, लेकिन अधिवक्ता का तर्क है कि इस कथित भ्रष्टाचार की साजिश का एक बड़ा हिस्सा राजधानी शिमला में रचा गया, इसलिए छोटा शिमला पुलिस थाना इस पर कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार रखता है। शिकायत के अनुसार, यह पूरा घोटाला तब प्रकाश में आया जब राजीव शांडिल ने चेस्टर हिल प्रोजेक्ट के संचालकों और एक अन्य व्यक्ति के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई।

राजीव शांडिल की शिकायत के बाद, सोलन के उपायुक्त ने मामले की जांच एसडीएम पूनम शर्मा को सौंपी थी। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जमीन के ये सौदे बेनामी तरीके से किए गए थे ताकि असली लाभार्थियों की पहचान को छिपाया जा सके। जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि ये सभी लेन-देन हिमाचल प्रदेश टेनेंसी और लैंड रिफार्म्स एक्ट, 1972 के कड़े प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन करते हैं। फिलहाल, पुलिस इस शिकायत के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

 

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