Uttarakhand: पिंडर घाटी में भारी भूस्खलन और जैकुनी के पास मार्ग बंद होने से पांच हजार की आबादी कटी

बागेश्वर। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बागेश्वर जिले के दुर्गम क्षेत्र पिंडर घाटी में बुधवार को एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसके कारण रिखाड़ी-बाछम मोटर मार्ग जैकुनी गांव के समीप पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और विशाल बोल्डर गिरने से सड़क का नामोनिशान मिट गया है। इस घटना के कारण क्षेत्र का सड़क संपर्क पूरी तरह से टूट गया है, जिससे लगभग पांच हजार की आबादी अपने ही गांवों में कैद होकर रह गई है। मार्ग बंद होने से न केवल दैनिक आवाजाही प्रभावित हुई है, बल्कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी संकट मंडराने लगा है।

पूर्व विधायक सहित दर्जनों लोग बीच रास्ते में फंसे
यह भूस्खलन उस समय हुआ जब क्षेत्र के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के लिए क्षेत्र भ्रमण पर थे। जैकुनी के पास अचानक हुए इस भूस्खलन के कारण पूर्व विधायक का काफिला बीच रास्ते में ही फंस गया। उनके साथ ग्रामीणों के चार वाहन और एक दर्जन से अधिक लोग भी वहीं फंसे हुए हैं। सड़क के दोनों ओर मलबे का ढेर होने के कारण वाहनों का निकलना नामुमकिन हो गया है। पूर्व विधायक ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सूचित किया। उन्होंने मांग की है कि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और मार्ग बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया जाए।

पहाड़ी से गिरे मलबे ने रोकी रफ्तार
स्थानीय निवासियों के अनुसार, खरकिया से करीब तीन किलोमीटर आगे खाती की ओर जाने वाला यह मोटर मार्ग लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। जैकुनी गांव के पास की पहाड़ी पिछले कुछ दिनों से दरक रही थी और बुधवार को अचानक एक बड़ा हिस्सा भरभराकर सड़क पर आ गिरा। मलबे के साथ आए बड़े-बड़े पत्थरों ने सड़क को पूरी तरह ढक लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र की जीवन रेखा है और इसके बंद होने से पिंडर घाटी, खाती, जैकुनी और खरकिया जैसे महत्वपूर्ण इलाकों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया है।

निर्माण कार्य और मशीनों के अभाव पर उठे सवाल
पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने इस स्थिति के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत चल रहे निर्माण कार्य की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क चौड़ीकरण और सुधारीकरण का कार्य काफी समय से चल रहा है, लेकिन मौके पर आधुनिक मशीनों का घोर अभाव है। वर्तमान में वहां मजदूरों से मैन्युअल तरीके से काम कराया जा रहा है, जो पहाड़ जैसे कठिन क्षेत्रों के लिए नाकाफी है।

ललित फर्स्वाण ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण के नाम पर पहाड़ की तलहटी से अवैध रूप से पत्थर खोदे जा रहे हैं, जिससे पहाड़ी की जड़ें कमजोर हो गई हैं और इसी कारण यह भूस्खलन हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाए और तुरंत भारी मशीनरी (जेसीबी और पोकलैंड) तैनात कर सड़क को साफ किया जाए।

पर्यटन सीजन और ग्रामीणों की चिंता
सड़क बंद होने के कारण फंसे हुए ग्रामीण भवान सिंह, उत्तम सिंह, हुकुम सिंह, जैत सिंह और तारा सिंह ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अभी तो मानसून की आपदा का सीजन शुरू भी नहीं हुआ है और सड़कें अभी से बंद होने लगी हैं। उन्होंने प्रशासन को याद दिलाया कि आने वाले दिनों में साहसिक पर्यटन का सीजन शुरू होने वाला है। पिंडर घाटी ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक प्रसिद्ध स्थान है। यदि मुख्य मार्ग इसी तरह बंद रहा, तो पर्यटन व्यवसाय से जुड़े स्थानीय लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द स्थाई समाधान की मांग की है।

अधिकारियों का आश्वासन
इस पूरे मामले पर पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता अंबरीश कुमार ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि विभाग को सूचना मिलते ही राहत कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मौके पर मजदूर तैनात हैं और सड़क से मलबा व पत्थर हटाने की प्रक्रिया जारी है। अधिशासी अभियंता ने भरोसा दिलाया है कि विभाग के कर्मचारी पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं और शाम तक हर हाल में मार्ग को छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि, विशाल बोल्डरों को हटाने के लिए अतिरिक्त मशीनरी की व्यवस्था भी की जा रही है। फिलहाल, प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से लोगों को प्रभावित क्षेत्र की ओर न जाने की सलाह दी है।_

 

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