Uttarakhand: मुख्यमंत्री धामी ने ऋषिकेश में श्री श्री रविशंकर से लिया आशीर्वाद और सामाजिक समरसता पर हुई महत्वपूर्ण वार्ता

ऋषिकेश। देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी ऋषिकेश यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक भेंट की। बुधवार को मुख्यमंत्री ने विश्व विख्यात आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के संस्थापक श्री श्री रविशंकर से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने आध्यात्मिक गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया और राज्य की सुख-समृद्धि के लिए मार्गदर्शन मांगा। गंगा के पावन तट पर स्थित ऋषिकेश में हुई इस उच्च स्तरीय भेंट में केवल व्यक्तिगत आस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों और उत्तराखंड के भविष्य के विकास को लेकर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। इस वार्ता के दौरान सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों के संरक्षण जैसे गंभीर विषयों पर दोनों दिग्गजों ने अपने विचार साझा किए।

आर्ट ऑफ लिविंग और वैश्विक शांति पर चर्चा
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री श्री रविशंकर द्वारा किए जा रहे वैश्विक कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पद्म विभूषण से सम्मानित श्री श्री रविशंकर ने अपनी संस्था ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में शांति और सौहार्द का संदेश फैलाया है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह संस्था योग, ध्यान और प्राचीन भारतीय दर्शन के जरिए विश्व के कोने-कोने में मानवीय मूल्यों को पुनर्जीवित करने में जुटी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, आज के दौर में जब पूरी दुनिया मानसिक तनाव और संघर्षों से जूझ रही है, तब श्री श्री रविशंकर का दर्शन लोगों को जीवन जीने की नई राह दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम से समाज में जो सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित हो रही है, वह वास्तव में सराहनीय है।

उत्तराखंड के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का महत्व
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उत्तराखंड जैसे आध्यात्मिक प्रदेश के लिए श्री श्री रविशंकर जैसे महान संतों का सानिध्य अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान ही अध्यात्म और धर्म से है। ऐसे में जब किसी बड़े आध्यात्मिक नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलता है, तो राज्य की कार्यप्रणाली में एक नई चेतना का संचार होता है। मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान बताया कि राज्य सरकार जनसेवा के अपने कार्यों में आध्यात्मिक चेतना को समाहित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग के भीतर सकारात्मकता पैदा करना और लोगों को आपसी भाईचारे से जोड़ना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। इसमें आध्यात्मिक गुरुओं की भूमिका एक मार्गदर्शक की तरह होती है जो प्रशासन को जनहित के पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है।

श्री श्री रविशंकर का प्रदेश को आशीर्वाद
भेंट के दौरान श्री श्री रविशंकर ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपना स्नेहपूर्ण आशीर्वाद प्रदान किया और उत्तराखंड की निरंतर उन्नति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में हो रहे विकास कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि उत्तराखंड की धरती साधारण नहीं है, बल्कि यह वह पावन भूमि है जिसकी आध्यात्मिक विरासत और नैसर्गिक सौंदर्य इसे विश्व के अन्य हिस्सों से विशिष्ट और अलग पहचान प्रदान करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमालय की गोद में बसे इस प्रदेश में पर्यटन और तीर्थाटन की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें आध्यात्मिक चेतना के साथ जोड़कर और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

सामूहिक प्रयासों से होगा सशक्त उत्तराखंड का निर्माण
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए श्री श्री रविशंकर ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को एक सशक्त और आदर्श राज्य बनाने के लिए ‘सामूहिक प्रयासों’ की महती आवश्यकता है। उनके अनुसार, जब सरकार, समाज और आध्यात्मिक संस्थाएं मिलकर एक दिशा में कार्य करती हैं, तभी स्थायी परिवर्तन संभव होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य की रक्षा करना और यहाँ की प्राचीन संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक ऊर्जा और संकल्प के बल पर उत्तराखंड आने वाले समय में विश्व का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बनकर उभरेगा, जहाँ शांति और प्रगति का अद्भुत मेल होगा।

सर्वांगीण विकास में संतों की भूमिका
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आध्यात्मिक गुरु की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य का सर्वांगीण विकास तभी मुमकिन है जब वह भौतिक प्रगति के साथ-साथ नैतिक और आध्यात्मिक रूप से भी सुदृढ़ हो। उन्होंने स्वीकार किया कि शासन चलाने में संतों और महात्माओं का मार्गदर्शन अपरिहार्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों के पास समाज की नब्ज पहचानने की गहरी दृष्टि होती है और उनके सुझावों से सरकार को अपनी नीतियों को और अधिक मानवीय बनाने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता की सेवा करना उनके लिए एक आध्यात्मिक अनुष्ठान की तरह है और श्री श्री रविशंकर जैसे महापुरुषों से मिली ऊर्जा उन्हें इस कठिन मार्ग पर आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती है।

इस शिष्टाचार भेंट के अंत में मुख्यमंत्री ने श्री श्री रविशंकर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। ऋषिकेश की शांत वादियों में हुई इस मुलाकात ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की सरकार विकास के आधुनिक पैमानों के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों को भी मजबूती से थामे हुए है। दोनों के बीच हुई यह वार्ता भविष्य में राज्य के सामाजिक ताने-बाने को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ आए अन्य प्रतिनिधियों ने भी आध्यात्मिक चर्चा का लाभ उठाया और राज्य की प्रगति के लिए साझा संकल्प को दोहराया।

 

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