Iran: ईरान की अमेरिका को आखिरी चेतावनी और होर्मुज की नाकेबंदी से दुनिया भर में मचेगा हाहाकार

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां वैश्विक महाशक्तियां सीधे तौर पर इस युद्ध की आग में झुलसने लगी हैं। शुक्रवार, 13 मार्च को फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक दुखद सूचना साझा करते हुए बताया कि इराक के उत्तरी कुर्द क्षेत्र स्थित इरबिल में हुए एक हमले में फ्रांस के एक सैनिक की मौत हो गई है। यह घटना उस समय हुई जब इरबिल में स्थित फ्रांसीसी सैन्य बेस को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया। इस हमले में केवल एक सैनिक की जान ही नहीं गई, बल्कि छह अन्य फ्रांसीसी सैनिक गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। ये सैनिक वहां एक बहुराष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी मिशन के तहत तैनात थे, जो इराकी सेना को इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी समूहों से लड़ने में तकनीकी और सैन्य सहयोग दे रहे थे।

इराक पर हुआ यह हमला इस बात का प्रमाण है कि मिडिल ईस्ट में जारी यह महायुद्ध अब अपनी सीमाएं लांघ चुका है। इराक जैसे देश, जो पहले से ही अस्थिरता का सामना कर रहे हैं, उन्हें अब अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की मौजूदगी के कारण भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। फ्रांस की इस सैन्य क्षति ने यूरोपीय देशों के बीच भी चिंता की लहर पैदा कर दी है, क्योंकि ईरान अब सीधे तौर पर उन देशों को निशाना बना रहा है जो अमेरिका के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

खाड़ी देशों पर ईरान का बढ़ता शिकंजा
जैसे-जैसे अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले तेज हो रहे हैं, ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए इस युद्ध में अन्य खाड़ी देशों को भी घसीटना शुरू कर दिया है। ईरान अब केवल इजरायल तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने इराक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख व्यापारिक केंद्र दुबई पर कई मिसाइलें दागी गईं, जिसने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और वहां रह रहे विदेशी नागरिकों के बीच दहशत पैदा कर दी है। ईरान ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि वह उसे ऐसे जख्म देगा जिसे अमेरिका आने वाले कई दशकों तक याद रखेगा और पछताने पर मजबूर हो जाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक अर्थव्यवस्था की दुखती रग
ईरान की सबसे बड़ी धमकी ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को लेकर आई है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस संकरे समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ और मजबूत करेगा। यदि ऐसा होता है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इस स्थिति को ‘तेल उद्योग के इतिहास की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा’ करार दिया है। आईईए की चेतावनी के अनुसार, इस रास्ते की नाकेबंदी से वैश्विक बाजार में तेल और गैस का ऐसा संकट पैदा होगा जिसे संभालना किसी भी देश के लिए संभव नहीं होगा।

हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी चेतावनी के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपने रुख पर अडिग हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बेहद सख्त लहजे में लिखा कि ईरान के “दुष्ट साम्राज्य” को उखाड़ फेंकना कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली वृद्धि से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका अब तेल की कीमतों की परवाह किए बिना ईरान के शासन को खत्म करने के अपने मिशन पर आगे बढ़ रहा है।

समुद्री बारूदी सुरंगें और आग का खतरा
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के हवाले से आ रही खबरें और भी डरावनी हैं। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलमार्ग में बड़े पैमाने पर समुद्री माइंस (बारूदी सुरंगें) बिछानी शुरू कर दी हैं। ईरान ने धमकी दी है कि यदि इस रास्ते से कोई भी गैस या तेल टैंकर गुजरने की कोशिश करेगा, तो वह उसमें आग लगा देगा। ईरान के सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हमले बंद नहीं होते, तब तक ईरान इस रास्ते से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा।

गौरतलब है कि दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति का पांचवां हिस्सा इसी छोटे से जलमार्ग से होकर गुजरता है। यह रास्ता भौगोलिक रूप से ईरान के तट के बिल्कुल करीब है, जिससे ईरान को यहां सामरिक बढ़त हासिल है।

ईरान के नेतृत्व का कड़ा रुख
ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने सोशल मीडिया पर अमेरिका को संदेश देते हुए लिखा कि युद्ध शुरू करना तो आसान होता है, लेकिन इसे कुछ ट्वीट्स के जरिए जीता नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका के “गलत अनुमानों” का जवाब अपनी पूरी ताकत से देगा। वहीं, ईरान के नए सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) मोजतबा खामेनेई ने भी पद संभालते ही अपनी मंशा साफ कर दी है। खामेनेई ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना अब समय की जरूरत है और ईरान इस नाकेबंदी से पीछे नहीं हटेगा।

इजरायल का लक्ष्य: शासन का अंत
दूसरी तरफ, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक टेलीविजन ब्रीफिंग में इस युद्ध के अपने असली उद्देश्यों का खुलासा किया। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजरायल का संयुक्त अभियान न केवल ईरान बल्कि उसके द्वारा समर्थित हिजबुल्लाह जैसे समूहों को कुचलने के लिए है। उन्होंने साफ किया कि इस युद्ध का मकसद केवल सैन्य जीत नहीं है, बल्कि ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को पूरी तरह नष्ट करना है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि वे ईरान के भीतर ऐसी स्थितियां पैदा करना चाहते हैं जिससे वहां के वर्तमान शासन को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके और ईरानी लोगों को इस सत्ता से मुक्ति मिल सके।

वर्तमान परिस्थितियां इशारा कर रही हैं कि आने वाले दिन वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। इराक में फ्रांसीसी सैनिक की मौत इस महायुद्ध के और अधिक घातक होने की महज एक शुरुआत हो सकती है।

 

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