नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी की कंपनियों के विरुद्ध एक बड़ी और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने रिलायंस समूह की दो प्रमुख वित्तीय कंपनियों, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) की 581 करोड़ रुपये से अधिक की नई संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों के मद्देनजर की गई है। इस ताजा कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी समूह की अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य बढ़कर 16,310 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े तक पहुंच गया है।
तेरह राज्यों में फैला जब्ती का जाल
ईडी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जब्ती का यह आदेश 11 मार्च को प्रभावी किया गया था। जांच एजेंसी ने देश के विभिन्न हिस्सों में फैली अचल संपत्तियों, विशेषकर जमीन के टुकड़ों को अपने कब्जे में लिया है। जब्ती की यह कार्रवाई केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें देश के 13 महत्वपूर्ण राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, गोवा और झारखंड जैसे नाम हैं। इन राज्यों के विभिन्न स्थानों पर स्थित जमीनों को अब कानूनी तौर पर कुर्क कर लिया गया है, जिनका कुल बाजार मूल्य 581.65 करोड़ रुपये आंका गया है।
फेमा और रिलायंस पावर पर तलाशी का असर
प्रवर्तन निदेशालय की यह ताजा कार्रवाई अचानक नहीं हुई है, बल्कि इसकी जड़ें पिछले कुछ दिनों से चल रही सघन जांच से जुड़ी हैं। इससे पहले 6 मार्च को रिलायंस पावर लिमिटेड के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत एक मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की जांच के दौरान एजेंसी ने रिलायंस पावर के परिसरों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। उस तलाशी में मिले दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर ही अब आरएचएफएल और आरसीएफएल की संपत्तियों को निशाना बनाया गया है। यह दर्शाता है कि ईडी रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों के बीच होने वाले वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को आपस में जोड़कर एक बड़े घोटाले की जांच कर रही है।
बैंकों की शिकायत और जांच की शुरुआत
इस पूरे मामले की शुरुआत बैंकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों से हुई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा दी गई आधिकारिक शिकायतों के आधार पर आरसीएफएल और आरएचएफएल के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की थी। बैंकों का आरोप था कि अनिल अंबानी की इन कंपनियों ने बैंकिंग व्यवस्था के जरिए भारी मात्रा में सार्वजनिक धन जुटाया, लेकिन उसका पुनर्भुगतान करने में विफल रहीं। सीबीआई की इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा उल्लंघन के कोण से अपनी जांच शुरू की, जिसमें अब संपत्तियों की जब्ती का दौर चल रहा है।
सार्वजनिक धन का गबन और एनपीए का संकट
प्रवर्तन निदेशालय की अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच से पता चला है कि आरएचएफएल और आरसीएफएल ने विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ‘पब्लिक फंड’ के नाम पर हजारों करोड़ रुपये जुटाए थे। लेकिन इन कंपनियों के कुप्रबंधन और संदिग्ध लेनदेन के कारण इस सार्वजनिक धन में से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ‘नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स’ (एनपीए) में तब्दील हो गई। यानी, जनता का 11,000 करोड़ रुपये बैंकों के लिए डूबता हुआ कर्ज बन गया, जिसका असर देश की बैंकिंग अर्थव्यवस्था पर पड़ा।
फंड डाइवर्जन और प्रमोटर्स की भूमिका
जांच में सबसे गंभीर खुलासा फंड के ‘डाइवर्जन’ यानी धन के हेरफेर को लेकर हुआ है। ईडी के अनुसार, आरएचएफएल और आरसीएफएल ने बैंकों से जो पैसा विकास और व्यावसायिक कार्यों के लिए लिया था, उसे रिलायंस समूह की ही अन्य आंतरिक कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया गया। यह पैसा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी कंपनियों के खातों में भेजा गया। जांच एजेंसी का मानना है कि यह डाइवर्जन किसी व्यापारिक आवश्यकता के कारण नहीं, बल्कि प्रमोटर्स और समूह के प्रभावशाली व्यक्तियों की ‘गलत नीयत’ के कारण किया गया था। समूह की वित्तीय स्थिति खराब होने के बावजूद सार्वजनिक धन को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में घुमाना कानूनी रूप से गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि कुर्क की गई संपत्तियों की कुल कीमत अब 16 हजार करोड़ रुपये से ऊपर निकल चुकी है। ईडी की यह कार्रवाई संकेत देती है कि आने वाले समय में समूह की अन्य संपत्तियों और प्रमोटर्स की भूमिका पर और भी कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। फिलहाल, 13 राज्यों में हुई इस जब्ती ने कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा दी है।
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