देहरादून। उत्तराखंड की जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने मिलावटखोरों के विरुद्ध अपनी मुहिम को और अधिक धार देने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार अब खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर अपना शिकंजा कसने के लिए एक नई और सख्त कार्ययोजना पर काम कर रही है। अब तक मिलावट की जांच और छापामारी केवल त्योहारों के समय ही प्रमुखता से देखी जाती थी, लेकिन अब सरकार ने तय किया है कि हर महीने एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत प्रदेश भर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की सघन जांच की जाएगी ताकि जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिए हैं कि जो लोग नागरिकों की सेहत से समझौता कर रहे हैं, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा न जाए।
हाट-मेलों पर रहेगी पैनी नजर
विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन बृहस्पतिवार को सदन में जन स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा। सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगने वाले हाट-मेलों पर प्रशासन की विशेष नजर रहेगी। मेलों में भारी भीड़ उमड़ती है और अक्सर वहां बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी रहती है। स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि इन मेलों में बिकने वाले खाने-पीने के सामान की नियमित सैंपलिंग की जाएगी ताकि आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिल सके।
नमूनों की जांच: पिछले दो वर्षों का लेखा-जोखा
सदन में पिछले दो वर्षों के दौरान की गई कार्रवाई के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि सरकार मिलावट के विरुद्ध लगातार सक्रिय है।
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वर्ष 2023-24 के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग ने विभिन्न स्थानों से कुल 1627 नमूने एकत्रित किए थे। जांच के उपरांत इनमें से 171 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे यानी फेल हो गए। नमूनों के फेल होने के आधार पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित पक्षों के विरुद्ध 171 वाद (मामले) पंजीकृत कराए।
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इसी प्रकार, वर्ष 2024-25 में अब तक 1684 नमूने लिए जा चुके हैं। इनमें से 159 नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, जिसके बाद सरकार ने 159 नए वाद दायर किए हैं। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि नमूनों के फेल होने की दर को देखते हुए निरंतर निगरानी अत्यंत आवश्यक है।
स्टाफ की कमी होगी दूर और देहरादून में बनेगी नई लैब
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में संसाधनों और जनशक्ति की कमी को दूर करने के लिए भी सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। वर्तमान में प्रदेश में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 28 पद रिक्त हैं, जिससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित होती है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन पदों को भरने के लिए लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजा जा चुका है। यदि आयोग के माध्यम से नियमित भर्ती में समय लगता है, तो सरकार वैकल्पिक तौर पर प्रतिनियुक्ति के जरिए इन पदों को तत्काल भरने पर विचार कर रही है ताकि फील्ड में निगरानी का कार्य प्रभावित न हो।
इसके अतिरिक्त, खाद्य पदार्थों की त्वरित और सटीक जांच के लिए बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है। धन सिंह रावत ने सदन को सूचित किया कि देहरादून में एक अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस प्रयोगशाला का निर्माण कार्य 31 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लैब के शुरू होने से नमूनों की जांच रिपोर्ट के लिए अब ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और मिलावटखोरों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही में तेजी आएगी।
पुष्कर सिंह धामी सरकार का यह कड़ा रुख मिलावटखोरों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। सरकार का मानना है कि जन स्वास्थ्य सर्वोपरि है और मुनाफे के चक्कर में लोगों की जान से खेलने वालों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है। हर महीने चलने वाले इस एक सप्ताह के विशेष अभियान से न केवल व्यापारियों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि उपभोक्ताओं में भी सुरक्षा का भाव पैदा होगा। प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि वे आधुनिक उपकरणों और मोबाइल टेस्टिंग वैन के माध्यम से अधिक से अधिक क्षेत्रों को कवर करें।