देहरादून। उत्तराखंड को ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और ठोस कदम उठाया है। 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के बाद अब प्रदेश सरकार खेलों को लेकर अपनी रणनीति को जमीनी स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने सदन को सूचित किया कि अब राज्य के प्रत्येक ब्लॉक में मिनी स्टेडियमों का निर्माण किया जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को निखरने का अवसर मिल सके। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में विशेष वित्तीय प्रावधान भी किए गए हैं।
ब्लॉक स्तर पर खेल सुविधाओं का होगा विस्तार
पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य खेल सुविधाओं का विकेंद्रीकरण करना है। अब तक राज्य के बड़े शहरों और जिला मुख्यालयों तक सीमित रहने वाली खेल सुविधाएं अब सुदूरवर्ती ब्लॉक स्तर तक पहुंचेंगी। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान जब पर्वतीय क्षेत्रों में खेल मैदानों और स्टेडियमों की स्थिति पर चर्चा हो रही थी, तब मुख्यमंत्री ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए इस योजना का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम बनने से उन युवाओं को लाभ मिलेगा जो संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पाते थे।
मिनी स्टेडियम के लिए मानक और लागत
विधानसभा में चर्चा के दौरान खेल मंत्री रेखा आर्या ने मिनी स्टेडियमों के निर्माण से संबंधित तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की जानकारी साझा की। रेखा आर्या ने बताया कि विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए कम से कम 1.18 एकड़ भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है। सरकार ने प्रत्येक मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए एक करोड़ 70 लाख रुपये का बजट आवंटित करने का प्रावधान किया है। यह राशि स्टेडियम में बुनियादी ढांचा तैयार करने, खेल के मैदान को विकसित करने और अन्य जरूरी सुविधाएं प्रदान करने के लिए दी जाएगी।
राष्ट्रीय खेलों की सफलता ने रखी आधारशिला
उत्तराखंड के लिए साल 2025 खेल इतिहास में एक स्वर्णिम वर्ष रहा है। राज्य ने न केवल 38वें राष्ट्रीय खेलों की गौरवशाली मेजबानी की, बल्कि मैदान पर भी अपनी धाक जमाई। उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने इन खेलों में कुल 103 पदक जीतकर अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि यदि उत्तराखंड के युवाओं को सही मंच और सुविधाएं मिलें, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक सकते हैं। राष्ट्रीय खेलों के इसी उत्साह को बरकरार रखने के लिए सरकार अब आधारभूत ढांचे को और अधिक सुदृढ़ कर रही है।
लेगेसी पॉलिसी और खेल अकादमियों का निर्माण
राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के दौरान उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल ढांचा विकसित किया गया था। अब इस बुनियादी ढांचे का भविष्य में सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए सरकार ‘लेगेसी पॉलिसी’ पर काम कर रही है। इस नीति के तहत सरकार ने निर्णय लिया है कि राष्ट्रीय खेलों के लिए बनाए गए बड़े स्टेडियमों और केंद्रों का उपयोग भविष्य में खेल अकादमियों के रूप में किया जाएगा। इन अकादमियों में प्रतिभावान खिलाड़ियों को पेशेवर प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे आगामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार हो सकें। शासन स्तर पर इस नीति को लागू करने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने की कार्यवाही तेजी से चल रही है।
खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का लक्ष्य
पुष्कर सिंह धामी सरकार का मानना है कि उत्तराखंड के युवाओं में साहस और शारीरिक क्षमता की कोई कमी नहीं है। ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियमों का निर्माण केवल ईंट और पत्थर का ढांचा खड़ा करना नहीं है, बल्कि एक नई खेल संस्कृति को जन्म देना है। पर्वतीय क्षेत्रों के दुर्गम इलाकों में खेल मैदानों की कमी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। 1.18 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाले ये मिनी स्टेडियम स्थानीय युवाओं के लिए अभ्यास का मुख्य केंद्र बनेंगे।
सरकार की इस पहल को खेल जगत और स्थानीय प्रतिनिधियों ने सराहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लॉक स्तर पर स्टेडियम बनने से ग्रामीण प्रतिभाओं की खोज करना आसान होगा और इससे राज्य में खेलों का एक मजबूत ईकोसिस्टम तैयार होगा। खेल मंत्री रेखा आर्या ने भी सदन में भरोसा दिलाया कि भूमि चिह्नीकरण और बजट आवंटन की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित रखा जाएगा ताकि जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू हो सके।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 के माध्यम से धामी सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी प्राथमिकता सूची में युवा और खेल सबसे ऊपर हैं। बुनियादी ढांचे के विस्तार और लेगेसी पॉलिसी के बेहतर क्रियान्वयन से आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के खेल मानचित्र पर एक प्रमुख शक्ति बनकर उभर सकता है। ब्लॉक स्तर पर होने वाला यह निवेश राज्य के भविष्य के चैंपियन तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।
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