नई दिल्ली। टी-20 विश्व कप के दौरान कोलंबो में होने वाले भारत और पाकिस्तान के बहुप्रतीक्षित मैच को लेकर बना संशय अब समाप्त हो गया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार के फैसले से पीछे हटने यानी ‘यू-टर्न’ लेने के लिए धन्यवाद दिया है। कोलंबो में 15 फरवरी को दोनों देशों के बीच ग्रुप स्टेज का मुकाबला खेला जाएगा, जिसकी आधिकारिक घोषणा आज होनी तय मानी जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में श्रीलंका की सक्रिय मध्यस्थता सबसे महत्वपूर्ण रही है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और शहबाज शरीफ के बीच सोमवार, 9 फरवरी की देर रात हुई लगभग 30 मिनट की टेलीफोन वार्ता इस मामले में गेम-चेंजर साबित हुई। इस बातचीत के बाद पाकिस्तान अपनी पिछली जिद छोड़कर भारत के साथ मैदान पर उतरने के लिए राजी हो गया। श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने इस खबर की पुष्टि करते हुए इसे ‘शुद्ध क्रिकेट कूटनीति’ करार दिया। उनके अनुसार, दोनों नेताओं की बातचीत ने क्रिकेट प्रेमियों के बीच छाई मायूसी को दूर करने का काम किया है।
पाकिस्तान को मनाने के पीछे केवल श्रीलंका ही नहीं, बल्कि अन्य क्रिकेट बोर्डों का भी दबाव था। पाकिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा की है कि उन्होंने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड द्वारा किए गए औपचारिक अनुरोधों और श्रीलंका, यूएई तथा अन्य सदस्य देशों के समर्थक संदेशों की गहन समीक्षा की है। इन देशों ने मौजूदा चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए पाकिस्तान के नेतृत्व से मांग की थी। अंततः अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत और सदस्य देशों के आग्रह को स्वीकार करते हुए पाकिस्तान ने मैच खेलने का निर्णय लिया।
श्रीलंका के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के इस कदम पर प्रसन्नता व्यक्त की है। दिसानायके ने कहा कि कोलंबो में होने वाले भारत-पाकिस्तान मैच का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है और वह इसके आयोजन को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने इस संकट को सुलझाने के लिए आईसीसी और अन्य सभी सहयोगियों का आभार जताया। साथ ही उन्होंने 1996 विश्व कप के उस दौर को याद किया जब सुरक्षा कारणों से अन्य टीमों ने श्रीलंका आने से मना कर दिया था, लेकिन भारत और पाकिस्तान ने एकजुटता दिखाते हुए कोलंबो में मैच खेला था।
राष्ट्रपति के अनुसार, श्रीलंका उस समय मिली एकजुटता को कभी नहीं भूल सकता। अब पूरी दुनिया की नजरें आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिसके बाद 15 फरवरी को क्रिकेट इतिहास की दो सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी टीमें एक बार फिर कोलंबो के मैदान पर आमने-सामने होंगी। इस मैच के आयोजन से न केवल खेल प्रेमियों में खुशी है, बल्कि यह खेल के माध्यम से कूटनीतिक जीत के रूप में भी देखा जा रहा है।
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