नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अभी तक प्रकाशित न हुई किताब को लेकर एक नया दावा किया है। राहुल गांधी का कहना है कि यह किताब अमेजन पर उपलब्ध है, जबकि प्रकाशक कंपनी का दावा इसके विपरीत है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली पुलिस ने पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की किताब के कथित सर्कुलेशन की जांच के लिए प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
राहुल गांधी ने इस मामले पर अपनी राय रखते हुए कहा कि जनरल नरवणे का एक पुराना ट्वीट मौजूद है जिसमें उन्होंने अपनी किताब के लिंक का अनुसरण करने की बात कही थी। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि इस स्थिति में या तो नरवणे गलत जानकारी दे रहे हैं या फिर पब्लिकेशन हाउस पेंगुइन झूठ बोल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पूर्व सेना प्रमुख की बातों को अधिक विश्वसनीय मानते हैं। राहुल गांधी के अनुसार, जनरल नरवणे ने साल 2023 में ही अपनी किताब खरीदने का आग्रह करते हुए ट्वीट किया था।
विपक्ष के नेता ने इस मामले में सरकार की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से ज्यादा जनरल नरवणे पर भरोसा है। राहुल गांधी का मानना है कि इस किताब में संभवतः कुछ ऐसी बातें दर्ज हैं जो भारत सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असहज करने वाली हो सकती हैं। उन्होंने जनता के सामने यह सवाल रखा कि क्या उन्हें पूर्व आर्मी चीफ से अधिक एक प्रकाशन संस्थान पर विश्वास करना चाहिए।
दूसरी ओर, प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि जनरल नरवणे की यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। किताब के अंश सार्वजनिक होने और उनके प्रसार को लेकर कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। राहुल गांधी ने अपने बयानों के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की है कि किताब के प्रकाशन में हो रही देरी या उससे जुड़े विवाद के पीछे कोई राजनीतिक कारण हो सकता है। फिलहाल, अमेजन पर किताब की उपलब्धता और जनरल के पुराने ट्वीट्स को लेकर राहुल गांधी के इन दावों ने इस पूरे प्रकरण को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। पुलिस अब किताब के कथित सर्कुलेशन के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है।
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