Delhi: लोकसभा में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष – The Hill News

Delhi: लोकसभा में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष

नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था संसद के मौजूदा बजट सत्र में गतिरोध और टकराव का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को भी लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भारी खींचतान देखने को मिली। जैसे ही सदन की बैठक प्रारंभ हुई, विपक्षी सांसदों ने अपनी मांगों को लेकर शोर-शराबा और नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सदन के भीतर व्यवस्थित ढंग से कार्य करना असंभव हो गया। शोर-गुल और अव्यवस्था को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही महज कुछ ही मिनटों के भीतर दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। यह स्थिति दर्शाती है कि बजट जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के बजाय दोनों पक्ष राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में उलझे हुए हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में बढ़ते हंगामे पर कड़ी आपत्ति जताई और विपक्षी सदस्यों को संसदीय मर्यादाओं का पाठ पढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संसद के नियमों के दायरे में रहकर अपनी बात रखने का हक प्रत्येक सदस्य को प्राप्त है। उन्होंने विपक्षी सांसदों को समझाने का प्रयास किया कि सदन लगातार गतिरोध पैदा करने, नारेबाजी करने या कार्यवाही में बाधा डालने के लिए नहीं है। ओम बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि यदि सदस्य गरिमापूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, तो उन्हें पर्याप्त अवसर दिया जाएगा, लेकिन शोर-शराबे के बीच सदन का संचालन करना संभव नहीं है। हालांकि, उनकी इस अपील का विपक्षी सदस्यों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा और वे लगातार नारेबाजी करते रहे।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच संसद की गलियारों से एक बड़ी खबर यह निकलकर सामने आई कि विपक्ष अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की गंभीर योजना बना रहा है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि विपक्षी दल अध्यक्ष की निष्पक्षता और उनके द्वारा सदन के संचालन के तरीकों से संतुष्ट नहीं हैं। इसी असंतोष को व्यक्त करने के लिए वे संवैधानिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव पेश करने पर विचार कर रहे हैं। यदि विपक्ष इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो यह केंद्र सरकार और विपक्षी गठबंधन के बीच चल रही जंग को एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर ले आएगा। इस प्रस्ताव की चर्चा ने सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल को काफी बढ़ा दिया है।

कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले विपक्षी नेताओं ने संसद भवन परिसर में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक भी की। इस बैठक में न केवल अविश्वास प्रस्ताव के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई, बल्कि सदन के भीतर सरकार को घेरने की आगे की रूपरेखा भी तैयार की गई। बैठक में मौजूद नेताओं ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए यह स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। विपक्षी सांसदों का मुख्य विरोध इस बात को लेकर था कि उन्हें और विशेष रूप से उनके नेता राहुल गांधी को अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं दिया जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते सदन के भीतर ‘राहुल गांधी को बोलने दो’ के नारे बुलंद किए गए।

कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर अपना रुख और भी कड़ा कर लिया है। पार्टी के आधिकारिक सूत्रों और प्रवक्ताओं का कहना है कि यदि सदन में राहुल गांधी को बिना किसी रोक-टोक के बोलने की अनुमति दी जाती है, तभी सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से चलने दी जाएगी। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से भाग रही है और विपक्ष की आवाज को अनसुना कर रही है। कांग्रेस की इस चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में भी संसद में हंगामे के आसार बने रहेंगे। विपक्ष का मानना है कि राहुल गांधी के संबोधन में वे मुद्दे शामिल हैं जिन्हें जनता के सामने लाना अत्यंत आवश्यक है।

इधर, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज सुबह एक साथ संसद पहुँचे। उनके आगमन के दौरान जब मीडिया कर्मियों ने उनसे सदन की वर्तमान स्थिति और जारी हंगामे के बारे में प्रश्न किया, तो मल्लिकार्जुन खरगे ने बड़े ही बेबाक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने एक सवाल के उत्तर में पलटकर पूछा कि ‘कौन कहता है कि आज सदन नहीं चलेगा?’ खरगे का यह बयान एक ओर जहाँ आत्मविश्वास से भरा नजर आया, वहीं दूसरी ओर इसमें सरकार के प्रति एक कड़ी चुनौती भी छिपी हुई थी। राहुल गांधी ने भी इस दौरान अपनी उपस्थिति से यह संकेत दिया कि वे सदन में मोर्चा संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

बजट सत्र के दौरान संसद में चल रहा यह हाई-वोल्टेज ड्रामा देश के लिए भी चिंता का विषय है। बजट सत्र में देश की आर्थिक प्रगति और नई नीतियों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन फिलहाल सदन केवल स्थगन और विरोध की भेंट चढ़ता दिख रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि वे हर नियम का पालन कर रहे हैं और विपक्ष जानबूझकर बाधा खड़ी कर रहा है, जबकि विपक्ष का दावा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए यह विरोध अनिवार्य है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्षी दल वास्तव में अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हैं और क्या ओम बिरला इस गतिरोध को सुलझाने में सफल हो पाते हैं। फिलहाल, दिल्ली की सियासत में संसद का यह सत्र टकराव और अनिश्चितता का केंद्र बना हुआ है।

 

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