बनबसा। उत्तराखंड की आर्थिक दिशा और दशा तय करने के उद्देश्य से एनएचपीसी बनबसा के सभागार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बजट-पूर्व संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आगामी बजट को समावेशी, विकासोन्मुखी और जन-आकांक्षाओं के अनुरूप बनाना था। संवाद के दौरान राज्य के समग्र विकास, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और शासन में जनभागीदारी को केंद्र में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड अब अपनी रजत जयंती वर्ष की उपलब्धियों के साथ 2047 तक एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन मुख्यमंत्री के अपर सचिव मनमोहन मैनाली ने किया। संवाद की शुरुआत में वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने राज्य की वर्तमान आर्थिक प्रगति का एक प्रभावशाली खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान उत्तराखंड के ‘कैपिटल आउटले’ में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। यह राशि 7,534 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 14,765 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। आर्थिक मोर्चे पर एक और बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य की जीडीपी, जो वर्ष 2021-22 में 2,54,000 करोड़ रुपये थी, वह अब 60 प्रतिशत की छलांग लगाकर 4,74,000 करोड़ रुपये हो गई है। यह आंकड़े राज्य की मजबूत होती आर्थिक स्थिति और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की पुष्टि करते हैं।
संवाद के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने अपनी राय और सुझाव रखे। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। सुझावों में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अनुदान बढ़ाने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को आधुनिक बनाने, सीवर लाइन और शौचालयों के निर्माण पर बल दिया गया। साथ ही, जिला पंचायत सदस्यों के लिए मानदेय बढ़ाने और उनके लिए अध्ययन भ्रमण की व्यवस्था करने की बात भी कही गई। शहरी विकास के अंतर्गत नगर निकायों के संसाधनों में वृद्धि, सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सोलर पैनलों की स्थापना और रजिस्ट्री शुल्क का एक हिस्सा नगर निगमों को देने जैसे सुझाव प्राप्त हुए।
कृषि और बागवानी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए इस क्षेत्र पर विशेष मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने कीवी और ब्लूबेरी जैसे उच्च मूल्य वाले फलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया। साथ ही, फसल कटाई के बाद के प्रबंधन (पोस्ट-हार्वेस्ट) और प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। किसानों को दी जाने वाली फल उत्पादन सब्सिडी को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने का महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आया। उद्योगों के संदर्भ में पर्वतीय क्षेत्रों की खाली पड़ी भूमि पर छोटे उद्योग स्थापित कर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने और पलायन रोकने की रणनीति पर चर्चा हुई। एमएसएमई (MSME) सेक्टर को वित्तीय सहायता और सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना भी प्राथमिकता सूची में रहा।
महिला सशक्तिकरण और पर्यटन पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और स्वच्छता उनकी सरकार की प्राथमिकता है। इसी क्रम में उन्होंने हर गांव में ‘पिंक टॉयलेट’ जैसी सुविधाएं विकसित करने की दिशा में कार्य करने की बात कही। महिलाओं को ब्याज मुक्त ऋण और अस्पतालों की कैंटीन जैसे क्षेत्रों में रोजगार देने के सुझावों को भी सराहा गया। पर्यटन के क्षेत्र में हेली सेवाओं के विस्तार, वैकल्पिक मार्गों के निर्माण और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन (सस्टेनेबल टूरिज्म) को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। इसके अलावा ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, सड़कों के चौड़ीकरण और ऊर्जा नेटवर्क को सुदृढ़ करने के सुझाव भी बजट संवाद का हिस्सा रहे।
पुष्कर सिंह धामी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य का बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के करोड़ों नागरिकों की अपेक्षाओं का दर्पण है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्राप्त हुए सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और उन्हें आगामी बजट में स्थान दिया जाएगा। उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि एक छोटा राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड ने वित्तीय प्रबंधन में देश भर में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने अधिकारियों और जनता से आह्वान किया कि वे अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें ताकि उत्तराखंड प्रगति के नए आयाम स्थापित कर सके।
मुख्यमंत्री ने संवाद के अंत में कहा कि जिन लोगों के सुझाव अभी प्राप्त नहीं हो सके हैं, वे भी अपने विचार प्रेषित कर सकते हैं। सरकार प्रत्येक वर्ग की आवश्यकताओं का ध्यान रख रही है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि संतुलित और सतत विकास के माध्यम से ही उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य बनाया जाएगा। संवाद कार्यक्रम में वन प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल, कुमाऊं मंडल आयुक्त दीपक रावत, चम्पावत जिलाधिकारी मनीष कुमार सहित अल्मोड़ा, हल्द्वानी, पिथौरागढ़ और रुद्रपुर के महापौर, जिला पंचायत अध्यक्षों और विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारियों ने शिरकत की। यह संवाद आगामी बजट को जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास माना जा रहा है।