Himachal: हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं का होगा कायाकल्प मुख्यमंत्री ने किया हाई-एंड टेक्नोलॉजी पर तीन हजार करोड़ खर्च करने का एलान – The Hill News

Himachal: हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं का होगा कायाकल्प मुख्यमंत्री ने किया हाई-एंड टेक्नोलॉजी पर तीन हजार करोड़ खर्च करने का एलान

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने और विकास कार्यों को नई गति देने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायकों की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने हेतु आयोजित बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने एलान किया कि आगामी दो वर्षों के भीतर प्रदेश में हाई-एंड टेक्नोलॉजी, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G/6G संचार, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन तथा क्वांटम कंप्यूटिंग पर लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण पर चर्चा करते हुए सुक्खू ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत पहले चरण में चमियाणा अस्पताल और टांडा मेडिकल कॉलेज में कर दी गई है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मिलने लगे। इसके अतिरिक्त, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में अगले दो महीनों के भीतर और टांडा मेडिकल कॉलेज में छह महीनों के भीतर पैट स्कैन मशीन स्थापित कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि आगामी तीन महीनों में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में ‘3 टेस्ला एमआरआई’ मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आरआईडीएफ (RIDF) के तहत 758.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

बैठक के दौरान सिरमौर जिले में सार्वजनिक परिवहन की समस्या का मुद्दा भी गरमाया। नाहन से कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व विधायक विनय कुमार ने क्षेत्र में बसों की भारी कमी की शिकायत की। इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भी विधायकों की बात का समर्थन किया। मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव संजय गुप्ता और अपने प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह को निर्देश दिए कि वे 15 दिनों के भीतर इस समस्या पर जवाब दें और बसों की कमी को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएं।

विकास कार्यों में आ रही बाधाओं पर चर्चा करते हुए कई विधायकों ने निर्माणाधीन स्कूल भवनों का मामला उठाया। बताया गया कि कई भवनों का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और उन पर 10 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है, लेकिन बजट के अभाव में कार्य रुका हुआ है। मुख्यमंत्री ने तुरंत ऐसे सभी अधूरे भवनों के लिए शेष राशि जारी करने के निर्देश दिए ताकि शिक्षा के बुनियादी ढांचे को समय पर पूरा किया जा सके। साथ ही, सुक्खू ने पीजीआई सेंटर के लिए लंबित 4 करोड़ रुपये की राशि भी तुरंत जारी करने के आदेश दिए।

बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती और सुखराम चौधरी ने विधायक क्षेत्र विकास निधि, ऐच्छिक निधि और राज्य विकास कोष पर लगी रोक का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। सत्ती ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास हमेशा ‘पैसा न होने’ का बहाना रहता है, जिसके कारण प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने कहा कि विधायक अपने क्षेत्र की जरूरतों को बेहतर समझते हैं, लेकिन निधियों पर रोक लगने से वे काम नहीं कर पा रहे हैं। सत्ती ने यह भी शिकायत की कि विधायकों की प्राथमिकता वाली योजनाओं की डीपीआर सही ढंग से नहीं बनाई जा रही है।

भाजपा द्वारा राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन पर पलटवार करते हुए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि भाजपा विधायक ‘गलत नंबर डायल’ कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विधायक निधि और ऐच्छिक निधि के लिए भाजपा विधायकों को राज्यपाल के पास जाने के बजाय मुख्यमंत्री से मिलना चाहिए था। अग्निहोत्री ने जोर देकर कहा कि योजना की बैठकों में सभी विधायकों की मांगों को पूरी गंभीरता से सुना जा रहा है और सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी और संसाधनों का कुशल प्रबंधन कर विकास की गति को बनाए रखा जाएगा।

 

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