Himachal: हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए होगा तीन हजार करोड़ रुपये का बड़ा निवेश – The Hill News

Himachal: हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए होगा तीन हजार करोड़ रुपये का बड़ा निवेश

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन करने और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आगामी अप्रैल माह से राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में विश्व स्तरीय और आधुनिक तकनीक से लैस चिकित्सा उपकरण खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस पूरी परियोजना पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि प्रदेश सरकार का मुख्य लक्ष्य केवल बुनियादी ढांचा खड़ा करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को सटीक निदान (डायग्नोस्टिक) सेवाएं प्राप्त हों। इसके लिए सरकार न केवल आधुनिक मशीनरी पर ध्यान दे रही है, बल्कि अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए भी ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पड़े पदों को भरने की भर्ती प्रक्रिया पहले से ही जारी है और भविष्य में जरूरत के अनुसार नए पदों का सृजन भी किया जाएगा। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण के संदर्भ में सुक्खू ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में जल्द ही पीईटी स्कैन और रोबोटिक सर्जरी की अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू की जाएंगी। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। गौरतलब है कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल चमियाना और डॉ. आरपीजीएमसी टांडा में रोबोटिक सर्जरी की सेवाएं पहले ही शुरू की जा चुकी हैं, जिससे मरीजों को जटिल ऑपरेशन में काफी लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही, ‘आदर्श स्वास्थ्य संस्थान’ योजना को भी और अधिक मजबूत किया जा रहा है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उनके घर के समीप ही बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।

डॉक्टरों की उपलब्धता और उनकी शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े सुधारों के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवा विभाग में 300 डॉक्टरों का एक विशेष ‘प्रशिक्षण एवं अवकाश आरक्षित कोटा’ (ट्रेनिंग एंड लीव रिजर्व कोटा) बनाने के निर्देश दिए। अक्सर देखा जाता है कि जब डॉक्टर उच्च शिक्षा या पीजी कोर्स के लिए जाते हैं, तो अस्पतालों में पद रिक्त होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस नए कोटे के सृजन से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी और रिक्त पदों को तुरंत भरा जा सकेगा। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सुक्खू ने निर्देश दिया कि मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के बैच छोटे होने चाहिए और किसी भी क्लास में 60 से अधिक छात्र नहीं होने चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार नए लेक्चर थिएटरों के निर्माण में पूरी सहायता प्रदान करेगी।

सरकार की प्राथमिकताओं को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना अनिवार्य है। सरकार का रोडमैप बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान बेहतर सुविधाओं, पर्याप्त श्रमशक्ति और उन्नत डायग्नोस्टिक सेवाओं से लैस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपकरणों के आने से न केवल रोगों का सही समय पर पता चल सकेगा, बल्कि इलाज के परिणामों में भी सुधार होगा। इन कदमों से न केवल मरीजों का कल्याण होगा, बल्कि डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के लिए काम करने का माहौल भी बेहतर बनेगा।

सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी पहलों और परियोजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए ताकि जनता को इनका लाभ जल्द से जल्द मिलना शुरू हो सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मेडिकल कॉलेजों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भविष्य में कुशल डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दीर्घकालिक निवेश हिमाचल प्रदेश को भविष्य में एक ‘हेल्थ हब’ के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।

इस समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, विशेष सचिव अश्वनी कुमार, आयुष निदेशक निपुण जिंदल, चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. राकेश शर्मा, स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. गोपाल बेरी और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन सुधारों से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक नई ऊर्जा का संचार होगा और आम आदमी का सरकारी अस्पतालों पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

 

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