Italy: रोम के गिरजाघर की तस्वीर पर विवाद, प्रधानमंत्री मेलोनी से चेहरे की समानता – The Hill News

Italy: रोम के गिरजाघर की तस्वीर पर विवाद, प्रधानमंत्री मेलोनी से चेहरे की समानता

रोम। इटली की राजधानी रोम के एक ऐतिहासिक गिरजाघर (चर्च) में हाल ही में किए गए मरम्मत कार्य के बाद एक अजीबोगरीब विवाद ने जन्म ले लिया है। गिरजाघर के भीतर स्थापित एक ‘चेरुब’ (फरिश्ते जैसा बच्चा या देवदूत) की तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसकी शक्ल इटली की वर्तमान प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से हूबहू मेल खाती है। इतालवी समाचार पत्रों द्वारा इस तस्वीर को प्रकाशित किए जाने के बाद से ही जनता और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। लोग इस कलाकृति की तुलना प्रधानमंत्री से कर रहे हैं, जिससे यह मामला अब आस्था और कला से ऊपर उठकर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए रोम के डियोसीज और इटली के संस्कृति मंत्रालय ने इस पर आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। विवाद का मुख्य कारण वह मुद्रा है जिसमें इस फरिश्ते को दिखाया गया है। कलाकृति में चेरुब को एक राजा के सामने झुकी हुई अवस्था में दिखाया गया है। आलोचक इसे एक गुप्त राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं, जहाँ वर्तमान सत्ता का संबंध राजशाही से जोड़ने का प्रयास प्रतीत होता है। स्थानीय मीडिया और जनता के बीच इस तस्वीर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

यह पूरा घटनाक्रम साल 2000 में निर्मित एक चैपल के रेनोवेशन (मरम्मत) से जुड़ा है। इस चैपल में इटली के अंतिम राजा उम्बर्टो द्वितीय की एक भव्य मूर्ति स्थापित है, जिसके साथ दो फरिश्तों की आकृतियां बनाई गई हैं। इन आकृतियों में से एक फरिश्ता इटली का नक्शा हाथ में लिए राजा के सम्मान में घुटनों के बल बैठा हुआ है। साल 2023 में चैपल की छत से पानी के रिसाव के कारण इसके जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया था। लेकिन जब हाल ही में रेस्टोरेशन (पुनर्स्थापना) के बाद इसे सार्वजनिक किया गया, तो लोग यह देखकर हैरान रह गए कि फरिश्ते का चेहरा बदल चुका था और वह पूरी तरह प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी जैसा दिखने लगा था।

इटली के प्रमुख अखबारों ने मरम्मत से पहले और बाद की तस्वीरें एक साथ छापी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि फरिश्ते के चेहरे की बनावट में जानबूझकर बदलाव किया गया है। संस्कृति मंत्री अलेसांद्रो गिउली ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए जांच के आदेश दिए हैं कि क्या मरम्मत करने वाले कलाकारों ने जानबूझकर प्रधानमंत्री मेलोनी का चेहरा उकेरा है। रोम के डियोसीज ने भी बयान जारी कर कहा है कि साल 2000 के मूल डिजाइन में ऐसा कोई चेहरा नहीं था। उन्होंने इसे बिना अनुमति किया गया बदलाव करार दिया है। अब पुराने दस्तावेजों, तस्वीरों और स्केच की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि फरिश्ते के मूल चेहरे को पुनः स्थापित किया जा सके।

जैसे-जैसे यह खबर फैली, गिरजाघर में पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है। हर कोई इस ‘मेलोनी जैसी दिखने वाली फरिश्ते की मूर्ति’ को अपनी आंखों से देखना चाहता है। स्थिति यह है कि अब इस जगह को लोगों ने अनौपचारिक रूप से “मेलोनी चैपल” कहना शुरू कर दिया है। पर्यटकों के लिए यह एक मजाकिया आकर्षण का केंद्र बन गया है, जबकि गंभीर विचार रखने वाले इसे लोकतंत्र और राजशाही के प्रतीकों के बीच एक खतरनाक राजनीतिक साजिश मान रहे हैं।

इस विवाद पर प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने भी अपनी चिर-परिचित मजाकिया शैली में जवाब दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को साझा करते हुए लिखा कि वे बिल्कुल भी किसी फरिश्ते या देवदूत जैसी नहीं दिखती हैं। मेलोनी का यह जवाब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है और इसे उनकी ओर से मामले को हल्का करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, विवाद के पीछे गहरे ऐतिहासिक कारण भी छिपे हुए हैं। जियोर्जिया मेलोनी की दक्षिणपंथी पार्टी की जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मुसोलिनी के समर्थकों द्वारा बनाई गई नियो-फासिस्ट विचारधारा से जुड़ी मानी जाती हैं। गौरतलब है कि इटली ने विश्व युद्ध के बाद राजशाही को पूरी तरह खारिज कर दिया था क्योंकि इटली के राजा ने तानाशाह मुसोलिनी का साथ दिया था। ऐसे में एक फरिश्ते का राजा के सामने झुकना और उसका चेहरा प्रधानमंत्री मेलोनी से मिलना, कई लोगों को मुसोलिनी और राजशाही के उसी पुराने दौर की याद दिला रहा है, जिसे इटली के लोग अब भूलना चाहते हैं। यही वजह है कि एक साधारण सी दिखने वाली कलाकृति अब इटली के लिए एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन गई है। फिलहाल जांच जारी है कि इस बदलाव के पीछे कलाकार की केवल कल्पना थी या कोई सोची-समझी राजनीतिक विचारधारा।

 

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