देहरादून।
उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब गदरपुर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक अरविंद पांडे के भाई के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। बाजपुर पुलिस ने यह कार्रवाई जमीन हड़पने और फर्जीवाड़े के आरोपों के आधार पर की है। इस मामले में विधायक के भाई देवानंद पांडे सहित कुल पांच लोगों को नामजद किया गया है। मामला सामने आने के बाद विधायक अरविंद पांडे ने न केवल अपने परिवार का बचाव किया है, बल्कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक बड़ी चुनौती भी पेश कर दी है।
पूरा मामला बाजपुर क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि देवानंद पांडे और उनके सहयोगियों ने दस्तावेजों में हेराफेरी और फर्जीवाड़ा करके उसकी जमीन पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि विरोध करने पर आरोपियों द्वारा डराया-धमकाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और धमकी देने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। सत्ताधारी दल के विधायक के सगे भाई का नाम प्राथमिकी में होने के कारण स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन पर भी दबाव महसूस किया जा रहा है।
इस घटनाक्रम के सार्वजनिक होते ही विधायक अरविंद पांडे स्वयं एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने इस मामले को लेकर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात की। पांडे ने डीजीपी के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके परिवार को इस मामले में साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की अत्यंत गहन और निष्पक्ष जांच करने की मांग उठाई है। विधायक का कहना है कि सत्य को सामने लाने के लिए पुलिस को बिना किसी राजनीतिक दबाव के काम करना चाहिए।
अरविंद पांडे ने इस दौरान एक बेहद चौंकाने वाली और अनोखी मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी आरोप लगाए गए हैं और जो भी सफाई दी जा रही है, उसकी सत्यता परखने के लिए दोनों पक्षों का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए। उनका मानना है कि नार्को टेस्ट के माध्यम से यह स्पष्ट हो जाएगा कि जमीन के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ किसने की है और कौन झूठ बोल रहा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि वे इस वैज्ञानिक परीक्षण को जांच का हिस्सा बनाएं ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।
इतना ही नहीं, अरविंद पांडे ने इस विवाद को अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए एक बड़ी घोषणा भी की है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि इस पूरे प्रकरण की जांच में वह स्वयं या उनके परिवार का कोई भी सदस्य दोषी पाया जाता है, तो वे तत्काल प्रभाव से राजनीति का त्याग कर देंगे। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में सुचिता और ईमानदारी का बड़ा महत्व है और यदि उनके परिवार पर लगा दाग साबित होता है, तो उन्हें सार्वजनिक जीवन में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं होगा।
भाजपा विधायक के इस कड़े रुख ने विपक्ष और उनके राजनीतिक विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। वर्तमान में बाजपुर पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वास्तव में जमीन के मालिकाना हक के कागजों में कोई अवैध बदलाव किया गया था या यह आपसी रंजिश का परिणाम है। इस मामले की जांच के परिणाम न केवल देवानंद पांडे का भविष्य तय करेंगे, बल्कि विधायक अरविंद पांडे के राजनीतिक जीवन पर भी इसका गहरा असर पड़ना तय है। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है और सभी की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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