नई दिल्ली।
भारत में निपाह वायरस के दो नए मामले सामने आने के बाद देश के स्वास्थ्य हलकों में मची हलचल के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक राहत भरी जानकारी साझा की है। वैश्विक स्वास्थ्य संस्था ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि भारत में इस समय निपाह वायरस के बड़े पैमाने पर फैलने का खतरा काफी कम है। संगठन के इस बयान के बाद उन आशंकाओं पर विराम लगने की उम्मीद है, जिनमें संक्रमण के देशव्यापी विस्तार का डर जताया जा रहा था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 30 जनवरी को अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि भारत में निपाह वायरस के इन दो मामलों का मिलना किसी गंभीर खतरे का संकेत नहीं है। संगठन ने वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करने के बाद कहा कि आम नागरिकों को इस वायरस को लेकर अत्यधिक घबराने या पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं है। डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली और निगरानी तंत्र ऐसे संक्रमणों को स्थानीय स्तर पर ही नियंत्रित करने में सक्षम है, जिसके कारण इसके बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैलने की संभावना अत्यंत न्यून है।
अक्सर देखा जाता है कि किसी भी संक्रामक बीमारी के मामले सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा और व्यापार को लेकर कड़े प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं। हालांकि, इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साफ कर दिया है कि भारत में फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिसके लिए ट्रैवल या ट्रेड पर किसी भी प्रकार की रोक लगाई जाए। संगठन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आर्थिक गतिविधियों और सामान्य आवाजाही को बाधित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। संस्था के अनुसार, संक्रमण के ये मामले छिटपुट प्रकृति के हैं और इन्हें चिन्हित कर लिया गया है, जिससे दूसरे क्षेत्रों या देशों के लिए जोखिम काफी कम हो जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, निपाह वायरस एक गंभीर संक्रमण जरूर है, लेकिन इसे समय पर पहचान और उचित एकांतवास (आइसोलेशन) के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। भारत में पूर्व में भी इस वायरस के मामले देखे गए हैं, और हर बार स्वास्थ्य एजेंसियों ने सक्रियता दिखाते हुए इसके प्रसार को रोकने में सफलता हासिल की है। डब्लूएचओ ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत की इसी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता की सराहना की है।
डब्ल्यूएचओ ने यह भी सुझाव दिया है कि यद्यपि खतरा कम है, फिर भी स्थानीय स्तर पर सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। संगठन ने स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ समन्वय बनाए रखने की बात कही है ताकि किसी भी नए मामले की तुरंत पहचान हो सके। लोगों को सलाह दी गई है कि वे संक्रमण से जुड़ी अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करें।
वैश्विक संस्था का यह रुख भारत के पर्यटन और व्यापार क्षेत्र के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा प्रतिबंधों की सिफारिश की जाती, तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता था। लेकिन डब्लूएचओ की इस हरी झंडी के बाद अब देश के भीतर और बाहर होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए रखेंगी, लेकिन फिलहाल के लिए वैश्विक स्तर पर भारत को इस वायरस के संदर्भ में सुरक्षित माना गया है।