परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के 56वें पूर्ण राज्यत्व दिवस के अवसर पर कांगड़ा जिले के ऐतिहासिक गांव परागपुर में राज्य स्तरीय समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह पहला अवसर था जब परागपुर में इस स्तर का कोई राजकीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों को राज्यत्व दिवस की बधाई देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार के योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक मौके पर किसानों, बागवानों, पेंशनरों और कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कर उन्हें बड़ी राहत प्रदान की।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किसानों और बागवानों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदेश में ‘कृषि एवं बागवानी आयोग’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस आयोग के कानूनी स्वरूप के लिए आगामी बजट सत्र में विधेयक लाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने परागपुर में एसडीएम कार्यालय और जसवां विधानसभा क्षेत्र के नलसूहा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) खोलने का भी एलान किया।
प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार को विरासत में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां मिली थीं। भारी वित्तीय दबाव के बावजूद सरकार ने सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारी कल्याण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने घोषणा की कि 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के सभी लंबित बकाया (एरियर) का भुगतान इसी जनवरी माह में कर दिया जाएगा, जिस पर 90 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा, 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उनके ग्रेच्युटी एरियर का 50 प्रतिशत और लीव एनकैशमेंट एरियर का 70 प्रतिशत भुगतान भी इसी महीने किया जाएगा, जिसके लिए 96 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार ‘समृद्ध हिमाचल विजन’ दस्तावेज तैयार कर रही है जो अब अंतिम चरण में है। यह दस्तावेज विशेषज्ञों और जनता के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है, जो अगले 25 वर्षों के विकास का रोडमैप होगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर हिमाचल के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार के समय में मिलने वाली राजस्व घाटा ग्रांट और जीएसटी क्षतिपूर्ति में भारी कटौती की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने के कारण केंद्र ने राज्य की ऋण सीमा में 1700 करोड़ रुपये की कटौती कर दी है, फिर भी सरकार अपने संसाधनों को बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कड़े फैसले ले रही है।
मुख्यमंत्री ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि वे प्रदेश के संसाधनों की लूट नहीं होने देंगे। उन्होंने वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल और करछम-वांगतू जलविद्युत परियोजना से जुड़ी कानूनी जीत का उल्लेख किया और कहा कि बीबीएमबी से एरियर वसूलने और शानन प्रोजेक्ट को वापस लेने के लिए सरकार दृढ़ता से लड़ रही है। उन्होंने हिमाचल को ‘उत्तर भारत का फेफड़ा’ बताते हुए कहा कि हम अपनी संपदा और नदियों के माध्यम से पूरे उत्तर भारत का पोषण करते हैं।
सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 में से 7 चुनावी गारंटियां पूरी की जा चुकी हैं। इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि के तहत पात्र महिलाओं को 1500 रुपये देने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी है। उन्होंने केंद्र द्वारा मनरेगा के ढांचे में किए गए बदलावों की आलोचना करते हुए कहा कि हिमाचल सरकार ने मनरेगा दिहाड़ी को 247 रुपये से बढ़ाकर 320 रुपये किया है। इसके अलावा, पिछले 20 वर्षों से कच्चे मकानों में रह रहे 27,717 आईआरडीपी परिवारों को पक्के घर देने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए सुधारों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में देश में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए 3000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और राज्य में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत एक क्रांतिकारी कदम है। इस अवसर पर उन्होंने नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के लिए ‘द व्हाइट ट्रुथ’ वेब सीरीज भी रिलीज की। कार्यक्रम में आयुष मंत्री यादविंदर गोमा, विधानसभा उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया सहित कई विधायक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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