नई दिल्ली। यूक्रेन का चेरनोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट, जो इतिहास की सबसे भीषण परमाणु त्रासदी का गवाह रहा है, मंगलवार को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता का केंद्र बन गया। रूसी सेना द्वारा किए गए व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण इस संवेदनशील संयंत्र की बाहरी बिजली आपूर्ति पूरी तरह से कट गई। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने आधिकारिक रूप से इस घटना की पुष्टि की है। हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि यूक्रेन के कई महत्वपूर्ण बिजली सबस्टेशन क्षतिग्रस्त हो गए, जो परमाणु सुरक्षा बनाए रखने के लिए अनिवार्य माने जाते हैं।
चेरनोबिल संयंत्र की बाहरी बिजली सप्लाई बंद होने के साथ-साथ यूक्रेन के अन्य परमाणु ऊर्जा केंद्रों की पावर लाइनों पर भी बुरा असर पड़ा है। आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी टीम पल-पल के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञ इस बात का आकलन करने में जुटे हैं कि बिजली के इस अचानक संकट से परमाणु सुरक्षा मानकों पर क्या प्रभाव पड़ा है।
रूस द्वारा मंगलवार की सुबह शुरू की गई इस सैन्य कार्रवाई ने न केवल ऊर्जा केंद्रों को बल्कि यूक्रेन की राजधानी कीव को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। भीषण ठंड के इस मौसम में कीव की हजारों ऊंची इमारतें और अपार्टमेंट बिजली व हीटिंग की सुविधा से वंचित हो गए हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों ने पानी की आपूर्ति व्यवस्था को भी बाधित कर दिया है, जिससे आम नागरिकों के सामने जीवन जीने का संकट खड़ा हो गया है। ऊर्जा ढांचे पर हुए इस सीधे प्रहार ने मानवीय संकट को और अधिक गहरा कर दिया है।
चेरनोबिल संयंत्र के इतिहास को देखते हुए यहाँ बिजली का जाना बेहद संवेदनशील मामला माना जाता है। 1986 में इसी स्थान पर हुए रिएक्टर धमाके ने आधी दुनिया को रेडियोधर्मी विकिरण के खतरे में डाल दिया था। यद्यपि वर्तमान में यह प्लांट पूरी तरह बंद है और इसे डीकमीशन किया जा चुका है, लेकिन यहाँ मौजूद ‘स्पेंट फ्यूल’ (खर्च हो चुके ईंधन) को निरंतर ठंडा रखने के लिए बिजली की आपूर्ति आवश्यक होती है। बाहरी ग्रिड से संपर्क टूटने के बाद, एक बड़े हादसे की आशंका पैदा हो गई थी, लेकिन प्लांट में लगे स्वचालित बैकअप जनरेटर और सुरक्षा प्रणालियों के तुरंत सक्रिय होने से स्थिति को नियंत्रण से बाहर होने से बचा लिया गया।
बाद में यूक्रेन के ऊर्जा मंत्रालय ने एक सकारात्मक जानकारी साझा करते हुए बताया कि तकनीकी टीमों के कड़े परिश्रम के बाद चेरनोबिल संयंत्र की बिजली सप्लाई बहाल कर दी गई है। अब संयंत्र की सभी महत्वपूर्ण इकाइयां और सुरक्षा उपकरण सामान्य रूप से यूक्रेन के ‘यूनाइटेड एनर्जी सिस्टम’ के माध्यम से संचालित हो रहे हैं। राहत की बात यह है कि वर्तमान में पर्यावरण या स्थानीय आबादी के लिए किसी भी प्रकार का रेडियोधर्मी खतरा नहीं पाया गया है।
हालांकि, आईएईए ने इस घटना को एक गंभीर चेतावनी के रूप में लिया है। संस्था का मानना है कि युद्ध के दौरान परमाणु संयंत्रों या उनके सहायक बुनियादी ढांचों पर होने वाले हमले भविष्य में किसी बड़ी तबाही का सबब बन सकते हैं। इस असुरक्षा को देखते हुए यूक्रेन सरकार ने आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की एक आपातकालीन बैठक बुलाने का आह्वान किया है। इस बैठक का उद्देश्य रूसी हमलों के कारण परमाणु सुरक्षा पर बढ़ते खतरों का विस्तृत जायजा लेना और भविष्य के लिए कड़े सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना है। विश्व समुदाय अब इस मामले में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
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