Bangladesh: विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी पर कप्तान लिटन दास ने बयान देने से किया इनकार

नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 के आगाज़ में अब मात्र दो सप्ताह का समय शेष रह गया है, लेकिन बांग्लादेश क्रिकेट टीम की भागीदारी को लेकर बना हुआ विवाद सुलझने के बजाय और अधिक उलझता जा रहा है। आज, 21 जनवरी को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को अपना अंतिम फैसला सुनाना है कि वे टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगे या नहीं। इसी बीच, बांग्लादेशी टीम के कप्तान लिटन दास के एक हालिया बयान ने खेल जगत में हलचल मचा दी है। लिटन ने न केवल टीम की भागीदारी पर अनिश्चितता जताई, बल्कि इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बात करने को अपनी सुरक्षा के लिए भी खतरा बताया।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आईसीसी से मांग की कि उनके मैच भारत के बजाय श्रीलंका में आयोजित किए जाएं। हालांकि, आईसीसी इस मांग को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। कई दौर की बैठकों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच कोई सर्वसम्मत समाधान नहीं निकल पाया है। आईसीसी ने अब बीसीबी को आज तक का अल्टीमेटम दिया है कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) के एक मैच के बाद जब पत्रकारों ने लिटन दास से विश्व कप की तैयारियों और टीम की भागीदारी से जुड़ा सवाल पूछा, तो कप्तान का जवाब काफी चौंकाने वाला था। लिटन ने कहा कि उन्हें स्वयं नहीं पता कि टीम विश्व कप खेलने जा रही है या नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय पूरा बांग्लादेश इस अनिश्चितता के साये में है। जब पत्रकारों ने इस विवाद पर उनकी राय जाननी चाही, तो लिटन ने कड़े शब्दों में कहा, “मैं समझता हूं कि आप क्या पूछने वाले हैं, लेकिन इस विषय पर कोई भी जवाब देना मेरे लिए सुरक्षित नहीं है।” कप्तान का यह बयान बांग्लादेश क्रिकेट के भीतर चल रहे भारी दबाव और डर की ओर इशारा करता है।

इधर, बांग्लादेश सरकार का रुख भी काफी कड़ा नजर आ रहा है। सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी सूरत में अपनी टीम को विश्व कप के लिए भारत नहीं भेजेंगे। नजरुल ने आरोप लगाया कि आईसीसी भारतीय क्रिकेट बोर्ड के दबाव में काम कर रहा है और बांग्लादेश पर अनुचित शर्तें थोपने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी ऐसी स्थितियों में वेन्यू बदले गए हैं, इसलिए बांग्लादेश को भारत में खेलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे टूर्नामेंट का बहिष्कार करने से पीछे नहीं हटेंगे।

यदि बांग्लादेश अपने फैसले पर अड़ा रहता है और विश्व कप से नाम वापस ले लेता है, तो नियमों के अनुसार स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया जा सकता है। रैंकिंग के आधार पर स्कॉटलैंड इस खाली स्थान को भरने का सबसे बड़ा दावेदार है। हालांकि, आसिफ नजरुल ने कहा कि वे आईसीसी के किसी भी दबाव या वैकल्पिक टीम की धमकियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

इस विवाद में अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) की भी एंट्री हो गई है। पीसीबी ने खुलकर बांग्लादेश का समर्थन करते हुए आईसीसी को एक औपचारिक पत्र लिखा है। पीसीबी ने अपने पत्र में कहा है कि वे भारत में न खेलने के बांग्लादेश के फैसले के साथ खड़े हैं। पाकिस्तान ने भी क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता का तर्क देते हुए बीसीबी की चिंताओं को जायज ठहराया है। पीसीबी के इस रुख ने विवाद को और अधिक कूटनीतिक रूप दे दिया है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें आज होने वाली आईसीसी की बैठक पर टिकी हैं, जहाँ यह तय होगा कि बांग्लादेश टी20 विश्व कप 2026 के मैदान पर दिखेगा या नहीं। लिटन दास की चुप्पी और सरकार का अड़ियल रुख किसी बड़े उलटफेर की ओर संकेत कर रहा है।

 

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