Uttarakhand: उधमसिंह नगर किसान आत्महत्या मामले में एसएसपी का बड़ा एक्शन थाना अध्यक्ष और सब इंस्पेक्टर निलंबित दस पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

उधमसिंह नगर। उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में एक किसान की आत्महत्या के मामले ने पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है। इस संवेदनशील प्रकरण में लापरवाही और उदासीनता बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। उधमसिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने के आरोप में थाना अध्यक्ष और एक सब इंस्पेक्टर समेत कुल 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इस कार्रवाई से जिले के पुलिस महकमे में कड़ा संदेश गया है कि जनसुनवाई में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने मृतक किसान सुखवंत सिंह के मामले की प्राथमिक जांच के बाद पाया कि पुलिस अधिकारियों ने इस गंभीर विषय को अत्यंत हल्के में लिया। मामले में कार्रवाई करते हुए एसएसपी ने थाना अध्यक्ष कुंदन सिंह रौतेला और सब इंस्पेक्टर प्रकाश बिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ित किसान की शिकायतों पर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए और मामले के प्रति पूरी तरह उदासीन बने रहे।

निलंबन के साथ-साथ एसएसपी ने बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर भी किया है। लाइन हाजिर होने वालों में सब इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार, एएसआई सोमवीर सिंह, हेड कांस्टेबल शेखर बनकोटि के साथ ही कांस्टेबल भूपेंद्र सिंह, दिनेश तिवारी, सुरेश चंद्र, योगेश चौधरी, राजेंद्र गिरी, दीपक प्रसाद और संजय कुमार शामिल हैं। एक साथ इतने पुलिसकर्मियों पर हुई इस कार्रवाई ने विभाग के भीतर मची अव्यवस्था को उजागर कर दिया है।

इस पूरे मामले की जड़ें काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या से जुड़ी हैं। सुखवंत सिंह ने मौत को गले लगाने से पहले एक बेहद भावुक और दर्दनाक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने अपनी आपबीती बताते हुए जिले के कुछ प्रॉपर्टी डीलरों पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का संगीन आरोप लगाया था। मृतक का कहना था कि धोखाधड़ी के कारण वह गहरे मानसिक तनाव में थे और आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद हो चुके थे।

वीडियो में सुखवंत सिंह ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि वह अपनी शिकायत लेकर कई बार पुलिस के पास गए और तहरीर देना चाही, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी। मृतक ने यह भी दावा किया था कि उनकी फरियाद सुनने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उन्हें ही मानसिक रूप से प्रताड़ित और परेशान किया। सुखवंत सिंह के अनुसार, न्याय की उम्मीद खत्म हो जाने और चारों ओर से निराशा मिलने के कारण ही उन्हें यह आत्मघाती कदम उठाना पड़ा।

किसान की मौत और उसके द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद स्थानीय जनता में भारी आक्रोश देखा जा रहा था। मामला सीधे तौर पर पुलिस की छवि और कार्यकुशलता से जुड़ा था, जिसे देखते हुए एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने त्वरित संज्ञान लिया। एसएसपी की इस कार्रवाई को पुलिस तंत्र की सफाई और जनता के बीच विश्वास बहाली के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की अभी और गहराई से जांच की जाएगी ताकि किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले असली गुनहगारों और उन्हें शह देने वाले चेहरों को बेनकाब किया जा सके। फिलहाल, एक साथ 12 पुलिसकर्मियों पर हुई इस कार्रवाई ने उधमसिंह नगर पुलिस में हड़कंप मचा दिया है।

 

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