Punjab: पंजाब में भ्रष्टाचार के विरुद्ध भगवंत मान सरकार का कड़ा प्रहार और प्रशासनिक शुचिता की नई मिसाल

चंडीगढ़। पंजाब में भ्रष्टाचार मुक्त शासन का सपना अब धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। भगवंत मान सरकार द्वारा सत्ता संभालते ही अपनाई गई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अब केवल एक चुनावी नारा न रहकर प्रशासनिक व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। साल 2025 इस अभियान के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार की मंशा जमीन पर असर करती दिखाई दी। विजिलेंस ब्यूरो पंजाब ने इस दौरान भ्रष्टाचार के मामलों में जिस तरह की व्यापक कार्रवाई की, उसने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में एक हलचल पैदा कर दी है।

सरकारी आंकड़ों और ताजा रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्ष 2025 के दौरान रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर मामलों में सैकड़ों की संख्या में छापेमारी की गई। विजिलेंस ब्यूरो की इन ताबड़तोड़ कार्रवाइयों की जद में केवल छोटे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि रसूखदार अधिकारी भी आए। पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग, नगर निगम, मंडी बोर्ड और कई अन्य महत्वपूर्ण सरकारी विभागों से जुड़े दर्जनों अधिकारियों और कर्मचारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। इस पूरी कवायद ने जनता के बीच यह कड़ा संदेश भेजा है कि अब पद की गरिमा या राजनीतिक रसूख किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई से नहीं बचा सकता।

भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई को धार देने के लिए सरकार ने शिकायत निवारण तंत्र को भी काफी मजबूत किया है। ‘मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन’ और ऑनलाइन पोर्टलों को विशेष रूप से सक्रिय किया गया, ताकि आम जनता बिना किसी डर के अपनी शिकायतें दर्ज करा सके। इन माध्यमों से प्राप्त होने वाली शिकायतों पर त्वरित और समयबद्ध जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। जांच के बाद न केवल प्राथमिकियां दर्ज की गईं, बल्कि कई मामलों में साक्ष्यों के आधार पर तत्काल गिरफ्तारियां भी हुईं। अनुशासन बनाए रखने के लिए सरकार ने कई दागदार अधिकारियों को निलंबित करने और कुछ को सेवा से बर्खास्त करने जैसे अत्यंत कठोर कदम भी उठाए, जो पिछले दशकों में विरले ही देखने को मिलते थे।

भ्रष्टाचार पर इस प्रहार के साथ-साथ भगवंत मान सरकार ने ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया है। अधिकांश नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने से सरकारी दफ्तरों में होने वाली प्रत्यक्ष ‘लेन-देन की संस्कृति’ पर प्रभावी अंकुश लगा है। जब काम के लिए लोगों का अधिकारियों से सीधा सामना कम होता है और प्रक्रियाएं पारदर्शी होती हैं, तो रिश्वतखोरी की गुंजाइश अपने आप कम हो जाती है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि डिजिटल माध्यम अपनाना भ्रष्टाचार की जड़ पर किया गया एक सीधा और सफल प्रहार है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सार्वजनिक मंचों से कई बार यह स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार करने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली या ऊंचे ओहदे वाला क्यों न हो, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। साल 2025 के दौरान हुई प्रशासनिक कार्रवाइयों ने मुख्यमंत्री के इस दावे को एक मजबूत आधार प्रदान किया है। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि अब सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ी है और आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों में अपना काम करवाने के लिए किसी अनुचित दबाव या रिश्वत का सामना नहीं करना पड़ रहा है। पंजाब सरकार की यह मुहिम राज्य को एक स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन की ओर ले जा रही है।

 

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