Himachal: हिमाचल पंचायत चुनाव पर सरकार ने हाई कोर्ट से मांगा छह महीने का वक्त – The Hill News

Himachal: हिमाचल पंचायत चुनाव पर सरकार ने हाई कोर्ट से मांगा छह महीने का वक्त

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के कार्यकाल और समय पर चुनाव कराने की मांग को लेकर दायर याचिका पर राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत किया। बुधवार को हुई इस अहम सुनवाई के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि उसकी मंशा पंचायत चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए टालने की बिल्कुल नहीं है। हालांकि, सरकार ने व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए अदालत से चुनावों की तैयारी और आयोजन के लिए कम से कम छह महीने का अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया है। हाई कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना और अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है।

अदालत में सरकार की ओर से दी गई दलीलों में मुख्य रूप से प्रशासनिक बाधाओं और परिसीमा निर्धारण की प्रक्रिया को आधार बनाया गया। सरकार ने अदालत को बताया कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में नई ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और नगर निगमों की परिसीमा तय करने यानी सीमांकन का कार्य चल रहा है। इस जटिल प्रक्रिया के कारण चुनाव क्षेत्रों के भूगोल और मतदाताओं की सूची में तकनीकी बदलाव की संभावनाएं बनी रहती हैं। सरकार का तर्क है कि इन परिस्थितियों में समय पर चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण है। इसीलिए निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए परिसीमा निर्धारण कार्य को पूरा करने हेतु कम से कम छह महीने का समय आवश्यक है।

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने सरकार की इन दलीलों पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे केवल चुनाव टालने का एक बहाना बताया। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि किसी आपदा या परिसीमा निर्धारण जैसे प्रशासनिक कार्यों का हवाला देकर लोकतांत्रिक चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए टालना संवैधानिक रूप से उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना सरकार की एक बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी है। याचिकाकर्ताओं ने सुझाव दिया कि यदि नई पंचायतों या जिला परिषदों की परिसीमा निर्धारण की प्रक्रिया अधूरी भी है, तो उसे चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद भी जारी रखा जा सकता है, लेकिन इसके नाम पर चुनाव रोकना गलत है।

सुनवाई के दौरान इस तथ्य पर भी ध्यान दिलाया गया कि राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही चुनाव कराने की दिशा में सक्रिय कदम उठा चुका था। मंगलवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि निर्वाचन आयोग ने सभी जिला उपायुक्तों को चुनाव से संबंधित आवश्यक सामग्री और स्टेशनरी वितरित करने के निर्देश जारी कर दिए थे। इतना ही नहीं, निर्वाचन आयोग ने 17 नवंबर को प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता भी लागू कर दी थी। इन तैयारियों से यह संकेत मिलता है कि आयोग चुनाव कराने के लिए मानसिक और प्रशासनिक रूप से तैयार था, लेकिन परिसीमा निर्धारण के मुद्दे ने प्रक्रिया को बाधित कर दिया है।

अब सबकी निगाहें हाई कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं। एक तरफ सरकार जहां प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए छह महीने का बफर समय मांग रही है, वहीं याचिकाकर्ता इसे संवैधानिक दायित्वों से पीछे हटना बता रहे हैं। अदालत द्वारा दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अब यह तय होना बाकी है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय सीमा के भीतर होंगे या फिर नई पंचायतों के गठन के लिए राज्य की जनता को अभी और लंबा इंतजार करना होगा। हिमाचल की ग्रामीण राजनीति के भविष्य के लिए हाई कोर्ट का यह फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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