शिमला। हिमाचल प्रदेश के अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए राज्य सरकार ने एक अनूठी पहल करते हुए उन्हें देश भ्रमण का एक सुनहरा मौका दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट टूर नामक एक विशेष शैक्षणिक और एक्सपोजर कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस टूर का मकसद बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित करना और उन्हें सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ आत्मीयता से बातचीत करते हुए उन्हें इस यात्रा का भरपूर आनंद लेने और नए अनुभव सीखने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस टूर में राज्य भर के विभिन्न बाल देखभाल संस्थानों यानी सीसीआई से कुल 52 बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। यह यात्रा 15 जनवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान बच्चे देश के कई बड़े शहरों और ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का भ्रमण करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत सरकार न केवल इन बच्चों की देखभाल के लिए प्रतिबद्ध है बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य देने के अवसर भी पैदा कर रही है। इस टूर का उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय एकता, भारत की समृद्ध विरासत और आधुनिक बुनियादी ढांचे से रूबरू कराना है।
यात्रा कार्यक्रम के अनुसार बच्चे चंडीगढ़, दिल्ली, आगरा और गोवा जाएंगे और वापस शिमला लौटेंगे। इस दौरान वे वॉल्वो बस, हवाई जहाज और ट्रेन जैसे विभिन्न परिवहन साधनों का अनुभव लेंगे। दिल्ली में बच्चे लाल किला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट, राज घाट, राष्ट्रीय प्राणी उद्यान और विज्ञान संग्रहालय जैसी जगहों को देखेंगे। आगरा में वे दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल का दीदार करेंगे। गोवा के पड़ाव में बच्चे मशहूर समुद्र तटों, चर्चों और मंदिरों के साथ क्रूज का आनंद लेंगे और विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र भी जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि यात्रा के दौरान बच्चों की सुरक्षा और आराम में कोई कोताही न बरती जाए। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने सत्ता संभालने के बाद टूटीकंडी बालिका आश्रम का दौरा कर बेसहारा बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जिम्मेदारी सरकार द्वारा उठाने का संकल्प लिया था। हिमाचल देश का पहला राज्य है जिसने इन वर्गों के लिए एक समर्पित कानून बनाया है। 28 फरवरी 2023 से अब तक लगभग 4000 अनाथ बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रूप में अपनाया गया है जिन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और पॉकेट मनी के साथ साथ अपना उद्यम शुरू करने के लिए 2 लाख रुपये की सहायता भी दी जा रही है।