देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी सेवा में लापरवाही और अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए एक सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने लंबे समय से बिना किसी सूचना के ड्यूटी से नदारद चल रहीं एक होम्योपैथिक चिकित्सक की सेवा समाप्ति के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी की तरह है कि ड्यूटी से गायब रहना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामला देहरादून जिले के चकराता स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय का है। यहां तैनात चिकित्सक उमंग शर्मा पिछले लगभग दो वर्षों से बिना किसी सूचना के अपनी ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित चल रही थीं। विभाग की ओर से उन्हें कई बार कार्यस्थल पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए और नोटिस भेजे गए लेकिन इसके बावजूद वह अपनी तैनाती स्थल पर नहीं पहुंचीं।
इस घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने अनुपस्थित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। मूल नियम 18(3) के तहत उनकी सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी जिसे अब मुख्यमंत्री के पास अंतिम अनुमोदन के लिए भेजा गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कार्रवाई को अंतिम रूप से अनुमोदित कर दिया है। उन्होंने अनधिकृत रूप से गायब चल रहीं उक्त चिकित्सक की सेवा समाप्त किए जाने के लिए अपनी औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को चुस्त दुरुस्त रखने और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा फैसला माना जा रहा है।