धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र काफी हंगामेदार रहा। धर्मशाला में चल रहे सदन की कार्यवाही के दौरान केंद्र सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद और अनुदान के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारतीय जनता पार्टी के विधायकों द्वारा किए जा रहे दावों पर कड़ा एतराज जताया और उनसे सीधे सवाल पूछे। बहस का मुख्य मुद्दा केंद्र से मिली 5 हजार करोड़ रुपये की कथित राशि थी, जिसे लेकर मुख्यमंत्री ने विपक्ष से सबूत मांग लिए।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा विधायक बलबीर वर्मा ने सदन में अपनी बात रखते हुए दावा किया कि केंद्रीय योजनाओं और मदद के जरिए हिमाचल प्रदेश को लगभग 4800 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। उनके इस बयान पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए पूछा कि आखिर पिछले तीन सालों में केंद्र ने यह 5 हजार करोड़ रुपये कब दिए? मुख्यमंत्री ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर भाजपा विधायकों के पास ऐसी कोई जानकारी है, तो वे सदन में इससे संबंधित नोटिफिकेशन या दस्तावेज दिखाएं।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन को आंकड़ों की जानकारी देते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से जो भी पैसा आया है, वह राज्य का संवैधानिक अधिकार है। मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार हर साल दो किस्तों में 180-180 करोड़ रुपये की दो ग्रांट जारी करती है। इसके अलावा आपदा के बाद पीडीएनए (पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट) के तहत राज्य को 451 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश में आई भीषण आपदा के दौरान राज्य सरकार ने अपने खुद के बजट और संसाधनों से 4500 करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज जारी किया था, न कि केंद्र के पैसे से।
इस चर्चा के दौरान भाजपा विधायक रणधीर शर्मा और मुख्यमंत्री के बीच भी सीधा आमना-सामना हुआ। रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर बैठे हैं और उन्हें इस तरह तथ्यों के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। इस पर पलटवार करते हुए सुक्खू ने कहा कि बात हमेशा तथ्यों और कागजों पर होनी चाहिए, न कि हवा-हवाई दावों पर।
बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने बलबीर वर्मा पर तंज कसते हुए चुटकी भी ली। उन्होंने बलबीर वर्मा से कहा कि आपने जो भाषण दिया है, उसका वीडियो इंटरनेट मीडिया और सोशल मीडिया पर खूब चलेगा और आपको वाहवाही मिलेगी, लेकिन हकीकत यह है कि आपको तथ्यों पर बात करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सचिवालय में बलबीर वर्मा की पकड़ बहुत अच्छी है। उन्हें वहां हर कोई जानता है। इसी क्रम में उन्होंने एक रोचक टिप्पणी भी की कि सचिवालय में सब उन्हें इसलिए जानते हैं क्योंकि उन्होंने सबको फ्लैट दे रखे हैं। हालांकि, बाद में माहौल को हल्का करते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि बलबीर वर्मा ने ये फ्लैट अपनी मेहनत की कमाई से बनाए हैं, जो कि एक अच्छी बात है। कुल मिलाकर ग्रांट के मुद्दे पर सदन का माहौल काफी गर्म रहा।