देहरादून। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी होने के साथ उत्तराखंड के 8 लाख 8 हजार से अधिक किसानों के बैंक खातों में 161.96 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा से देशभर के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से कुल 18,690 करोड़ रुपये जारी किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के हाथीबड़कला स्थित सर्वे ऑडिटोरियम में आयोजित पीएम-किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लाभार्थी किसानों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण पहल है। वर्ष 2019 में योजना की पहली किस्त जारी होने के समय उत्तराखंड में करीब चार लाख किसान इसके लाभार्थी थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर आठ लाख से अधिक हो गई है।
धामी ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में किसानों की भूमिका अहम है। किसान अपनी मेहनत से अन्न उत्पादन करने के साथ अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास में भी योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय, सुरक्षा और समृद्धि के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा और मिट्टी की गुणवत्ता के अनुरूप खेती करने में मदद मिलती है। राज्य सरकार भी सिंचाई, प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में नहरों से सिंचाई को निःशुल्क किया गया है और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बजट में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। करीब 115 करोड़ रुपये के निवेश से अब तक 350 से अधिक आधुनिक पॉलीहाउस तैयार किए गए हैं। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप मजबूत बनाने के लिए एक हजार करोड़ रुपये की लागत वाली उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग परियोजना को मंजूरी दी गई है।
फल उत्पादन और मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट नीतियों के साथ स्टेट मिलेट मिशन संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन योजनाओं के तहत पात्र किसानों को विभिन्न गतिविधियों में 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
किसानों की उपज को सुरक्षित रखने और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए कोल्ड चेन, कोल्ड स्टोरेज, नियंत्रित वातावरण भंडारण तथा खाद्य प्रसंस्करण सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। सगंध खेती को बढ़ावा देने के लिए महक क्रांति नीति के तहत सात एरोमा वैली विकसित की जा रही हैं और 23 हजार हेक्टेयर भूमि पर सुगंधित पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं, हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के जरिए स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि धान और गेहूं की खरीद के लिए अनुपूरक बजट में 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पर्वतीय कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, मत्स्य पालन और मौन पालन जैसे क्षेत्रों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत मिल सकें।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि किसानों की कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लैवेंडर और डेंडेलियन जैसी सुगंधित एवं औषधीय फसलों की खेती को भी बढ़ावा दे रही है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अवसर पर विधायक बृजभूषण गैरोला, उत्तराखंड राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह चौधरी, राज्यमंत्री प्रताप सिंह पंवार, सचिव कृषि डॉ. एस.एन. पांडेय, कृषि एवं उद्यान महानिदेशक डॉ. आनंद श्रीवास्तव सहित कई अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।