नई दिल्ली। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने चीन से लगी सीमा पर सुरक्षा और युद्ध-तैयारी मजबूत करने के लिए शौर्य कमांडो नाम से एक नई लड़ाकू इकाई तैयार की है। आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर के मुताबिक, इन कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ गतिरोध के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। अब इन्हें हर बॉर्डर बटालियन में तैनात करने की योजना है।
आईटीबीपी चीन के साथ लगी 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी तैयारियों को मजबूत कर रही है। बल के आधुनिकीकरण अभियान के तहत आधुनिक युद्ध तकनीकों, विशेष प्रशिक्षण और निगरानी क्षमताओं पर जोर दिया जा रहा है।
24 अक्टूबर को बल के 65वें स्थापना दिवस से पहले राजस्थान के अलवर स्थित आईटीबीपी बेस पर जवानों को संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच युद्ध के पारंपरिक तरीकों पर ही निर्भर नहीं रहा जा सकता। चीन सीमा पर प्रभावी ढंग से चुनौतियों का सामना करने के लिए नई तकनीक और विशेष प्रशिक्षण की जरूरत है।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर जोर
आईटीबीपी ने अपनी सीमा-रक्षक बटालियनों में ड्रोन प्लाटून गठित किए हैं। जवानों को ड्रोन संचालन के साथ इस तकनीक को विकसित करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कपूर ने बताया कि बल को सरकार से 400 करोड़ रुपये की राशि मिली है, जिसमें से 70 प्रतिशत का उपयोग ड्रोन युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने में किया जाएगा।
इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने 4,000 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसमें ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है। इन कदमों का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और अभियान संबंधी क्षमताओं को बेहतर बनाना है।
गलवान जैसी परिस्थितियों के लिए प्रशिक्षण
आईटीबीपी ने जवानों को कठिन युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एक नया स्ट्राइक कोर्स भी तैयार किया है। इसके तहत जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। कपूर के अनुसार, 2027 के अंत तक पूरी फोर्स को इस प्रशिक्षण से लैस करने का लक्ष्य है।
गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। बाद में चीन ने भी अपने चार सैनिकों की मौत स्वीकार की थी।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी
युद्धक क्षमता बढ़ाने के साथ आईटीबीपी ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में जवानों के लिए बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बना रही है। बल जमीन के नीचे आश्रय स्थल तैयार कर रहा है, ताकि संघर्ष की स्थिति में जवानों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही बैरकों में इन्सुलेशन, सोलर वॉटर हीटर और दूरस्थ चौकियों पर बिजली की उपलब्धता के लिए जनरेटर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
अत्यधिक ठंड में वाहनों को चालू करने में मदद के लिए कोल्ड-स्टार्ट किट भी शामिल की गई हैं। इन प्रयासों के जरिए आईटीबीपी को चीन सीमा पर तैनात एक सक्षम उच्च पर्वतीय युद्धक बल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
सीमा सुरक्षा को लेकर कांग्रेस के सवाल
इस बीच कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने चीन के साथ सीमा संबंधी मुद्दों पर केंद्र सरकार की नीति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ हालिया झड़पों और इन घटनाओं पर सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर चिंता जताई। रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि सरकार को सीमा पर सामने आ रही चुनौतियों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिशों और वहां 60,000 मेगावाट क्षमता के बांध से जुड़ी खबरों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक भारत की पहुंच प्रभावित हुई है। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं; उपलब्ध विवरण में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।
आईटीबीपी का आधुनिकीकरण ऐसे समय में आगे बढ़ रहा है, जब चीन सीमा पर निगरानी, विशेष प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जवानों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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