नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग पूर्व सैनिकों को दिव्यांगता पेंशन दिए जाने से जुड़े 271 मामलों में केंद्र सरकार की अपीलें खारिज कर दी हैं। अदालत ने इस दौरान रक्षा मंत्रालय की वर्ष 2015 की एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि रिपोर्ट में दिव्यांग सैनिकों को अत्यधिक तकनीकी आधार पर लाभ से वंचित किए जाने की स्थिति पर चिंता जताई गई थी।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र की ओर से दाखिल उन सभी 271 अपीलों को खारिज किया, जिनमें पूर्व सैनिकों को दिव्यांगता पेंशन देने संबंधी आदेशों को चुनौती दी गई थी। अदालत का यह फैसला 15 सितंबर को सुनाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में रक्षा मंत्रालय की उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें दिव्यांग सैनिकों को मिलने वाले लाभों से जुड़े मामलों की स्थिति पर चर्चा की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कई दिव्यांग सैनिकों को अब भी तकनीकी आधार पर दिव्यांगता लाभ हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि कुछ अन्य देश इस दिशा में भारत से आगे बढ़ चुके हैं।
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में विशेष रूप से उन मामलों को वापस लेने की सिफारिश की गई थी, जिनमें दिव्यांग सैनिकों को दिव्यांगता पेंशन देने के आदेशों को चुनौती दी गई थी। रिपोर्ट का उद्देश्य ऐसे मामलों में अनावश्यक कानूनी विवादों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाना था।
पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में दिव्यांग सैनिकों के खिलाफ लंबित इस प्रकार की अपीलों को तत्काल वापस लेने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, अदालत के अनुसार इस सिफारिश को अपेक्षित तरीके से लागू नहीं किया गया। शीर्ष अदालत ने इस स्थिति पर अफसोस जताते हुए कहा कि रिपोर्ट में की गई सिफारिश के बावजूद ऐसे मामले अदालत के सामने बने रहे।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन पूर्व सैनिकों से जुड़े मामलों में आया है, जिनके दिव्यांगता पेंशन संबंधी दावों को लेकर कानूनी विवाद चल रहे थे। केंद्र सरकार ने निचली अदालतों या संबंधित न्यायिक आदेशों के खिलाफ 271 अपीलें दाखिल की थीं। इन अपीलों के जरिए पूर्व सैनिकों को दिव्यांगता पेंशन दिए जाने के आदेशों को चुनौती दी गई थी।
पीठ द्वारा सभी 271 अपीलों को खारिज किए जाने के साथ इन मामलों में केंद्र की चुनौती समाप्त हो गई। अदालत की टिप्पणी में रक्षा मंत्रालय की 2015 की रिपोर्ट में व्यक्त चिंता और उसमें की गई सिफारिश के प्रभावी क्रियान्वयन के महत्व को रेखांकित किया गया।
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