तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई रोकने के ऐलान के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और जुबानी जंग और अधिक तेज हो गई है। जहाँ ट्रंप इसे एक रणनीतिक समझौते के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं ईरानी मीडिया ने उन पर तीखा हमला करते हुए उनका जमकर मजाक उड़ाया है। ईरानी समाचार एजेंसियों ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे वॉशिंगटन की मजबूरी और सैन्य मोर्चे पर पीछे हटने का संकेत बताया है। तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
क्या कहा डोनल्ड ट्रंप ने?
डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के माध्यम से दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने दावा किया कि यह फैसला क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण देशों और स्वयं ईरान के अनुरोध पर लिया गया है। ट्रंप के अनुसार, मिडिल ईस्ट के देशों ने अमेरिका से किसी भी प्रकार का हमला न करने की अपील की है क्योंकि एक व्यापक समझौते के मानकों (पैरामीटर्स) पर सहमति बन गई है। ट्रंप ने यहाँ तक दावा कर दिया कि इस प्रस्तावित समझौते के तहत सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को तुरंत और पूरी तरह से खोलना भी शामिल है, जिससे वैश्विक व्यापार सुगम हो सकेगा।
“दम निकल गया”: ईरानी मीडिया का तीखा पलटवार
ट्रंप के इन दावों के विपरीत, ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। ईरान की प्रमुख समाचार एजेंसी ‘फार्स’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें ट्रंप को “मूर्ख” बताते हुए लिखा गया कि उनके दावों का गुब्बारा अब फूट चुका है और उनका “दम निकल गया है।” ईरानी मीडिया का तर्क है कि ट्रंप अपनी “खोखली धमकियों” से एक बार फिर पीछे हट गए हैं और अब वे अपनी इस सैन्य वापसी को दुनिया के सामने एक एहसान के तौर पर पेश करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने ट्रंप के किसी भी समझौते या अनुरोध वाले दावे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर फंसा पेंच
होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के ट्रंप के दावे पर भी तेहरान ने कड़ा एतराज जताया है। ‘फार्स’ एजेंसी ने ईरानी वार्ताकारों के करीबी सूत्रों के हवाले से स्पष्ट किया कि यह समुद्री रास्ता तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियां और आक्रामक हरकतें जारी रखता है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और सामरिक हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। वर्तमान में सैन्य अधिकारियों के अनुसार ईरानी सेना हाई अलर्ट पर है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए खुद को पूरी तरह तैयार बता रही है।
मिसाइलों की कमी बना बड़ा मुद्दा
ईरानी मीडिया ने ट्रंप के इस अचानक हृदय परिवर्तन के पीछे एक और बड़ा कारण बताया है। ‘तस्नीम’ समाचार एजेंसी ने पश्चिमी देशों की उन हालिया रिपोर्टों का हवाला दिया जिनमें दावा किया गया है कि अमेरिकी एयर डिफेंस मिसाइलों का स्टॉक काफी कम हो गया है। ईरानी विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के हमला रोकने के फैसले के पीछे मुख्य वजह असल में सैन्य संसाधनों की कमी और अमेरिकी शस्त्र भंडार का खाली होना है, न कि कोई कूटनीतिक गुजारिश। ईरान का दावा है कि अमेरिका इस समय किसी लंबी और खर्चीली जंग को लड़ने की स्थिति में नहीं है।
तनावपूर्ण सैन्य तनातनी की पृष्ठभूमि
यह पूरी बयानबाजी पिछले पांच महीनों से चल रही भीषण सैन्य तनातनी का हिस्सा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट के दौरान अमेरिका और इजरायल ने कई बार तेहरान पर हमले की योजना बनाई थी। हालांकि, एक पुराने युद्धविराम के टूटने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट मंडराने लगा था। ट्रंप ने हाल ही में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से भी इस मसले पर लंबी चर्चा की है, जहाँ उन्होंने दोहराया कि उनकी सेना ईरान के खिलाफ जाने के लिए तैयार है, लेकिन वे वर्तमान में शांति के अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल अब भी मंडरा रहे हैं।
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