देहरादून। उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी, त्वरित और संगठित बनाने के उद्देश्य से बुधवार को एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। उत्तराखंड सब एरिया में आयोजित इस बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु मानसून अवधि और भविष्य की अन्य आपदा स्थितियों में मिलकर कार्य करने, उपलब्ध संसाधनों का इष्टतम उपयोग करने और आपसी तालमेल को बेहतर बनाना रहा।
आपदा के दौरान ‘गोल्डन ऑवर’ पर विशेष ध्यान
बैठक के दौरान उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) ब्रिगेडियर आर.एस. थापा ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सेना का प्राथमिक उद्देश्य हमेशा मानव जीवन की रक्षा करना होता है। उन्होंने ‘गोल्डन ऑवर’ यानी आपदा के तुरंत बाद के शुरुआती समय की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यदि इस दौरान त्वरित कार्रवाई की जाए, तो अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती है। ब्रिगेडियर थापा ने भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना उत्तराखंड में किसी भी आपात स्थिति के लिए सदैव तत्पर है और प्रशासन के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान और सक्रियता से जारी रहेगा।
सेना की पेशेवर दक्षता और पिछले अनुभवों की चर्चा
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सेना हमेशा एक भरोसेमंद सहयोगी साबित हुई है। उन्होंने वर्ष 2024 में केदारघाटी में आई भीषण आपदा और वर्ष 2025 में धराली क्षेत्र के संकट का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे सेना और वायु सेना ने अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों तीर्थयात्रियों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया। विनोद कुमार सुमन ने कहा कि सेना की संवेदनशीलता और पेशेवर दक्षता दुर्गम क्षेत्रों में राहत पहुँचाने में संजीवनी का काम करती है।
डिजिटल पोर्टल और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन
प्रशासन की ओर से सेना से एक विशेष अनुरोध किया गया कि राहत एवं बचाव कार्यों में उपयोग होने वाले उनके अत्याधुनिक उपकरणों, भारी मशीनरी और अन्य तकनीकी संसाधनों का विवरण ‘इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क’ (IDRN) पोर्टल पर अपलोड किया जाए। इससे लाभ यह होगा कि आपदा के समय विभिन्न एजेंसियां यह जान सकेंगी कि कौन सा संसाधन कहाँ उपलब्ध है और उसका उपयोग कितनी जल्दी किया जा सकता है। यह डिजिटल एकीकरण भविष्य में बचाव कार्यों की गति को कई गुना बढ़ा सकता है।
क्विक रिस्पॉन्स टीम और पूर्व सैनिकों की भागीदारी
बैठक में राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए पूर्व सैनिकों के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ लेने पर भी गहन मंथन हुआ। विभिन्न जनपदों में गठित की जा रही क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) में सेना की प्रत्यक्ष सहभागिता पर चर्चा की गई। यह प्रस्ताव रखा गया कि स्थानीय स्तर पर मौजूद पूर्व सैनिकों को आपदा प्रबंधन की मुख्यधारा से जोड़ा जाए, क्योंकि उनकी ट्रेनिंग और क्षेत्रीय जानकारी संकट के समय अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। राज्य सरकार ने सेना को हर संभव विभागीय सहयोग उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी
इस रणनीतिक चर्चा में यूएसडीएमए और सेना के कई प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे। इनमें यूएसडीएमए के एसीईओ प्रशासन प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी और जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा शामिल थे। इसके अतिरिक्त आपदा प्रबंधन के कई विशेषज्ञों ने भी अपने सुझाव साझा किए। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के नियमित संवाद और साझा रणनीति से उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में आपदा के खतरों को कम करने और प्रभावितों को त्वरित न्याय व राहत पहुँचाने में बड़ी सफलता मिलेगी।