Uttarakhand: ज्योतिर्मठ पुनर्वास कार्यों की प्रगति से एनडीएमए संतुष्ट, प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और आजीविका रहेगी प्राथमिकता

देहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने ज्योतिर्मठ भूधंसाव के बाद संचालित किए जा रहे पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की है। गुरुवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में हुई उच्च स्तरीय बैठक में एनडीएमए के सदस्यों ने कार्यों की वर्तमान प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और भविष्य की चुनौतियों के समाधान के लिए अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार और एनडीएमए ज्योतिर्मठ के प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं।

एनडीएमए की सदस्य रीता मिस्सल ने बैठक के दौरान जोर दिया कि पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय का विश्वास जीतना और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास कार्यों को केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि प्रभावितों की बेहतर आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। रीता मिस्सल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और इसे निर्धारित समय के भीतर पूरा किया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को किसी भी प्रकार की मानसिक या आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

बैठक में एनडीएमए के अन्य सदस्य दिनेश कुमार असवाल ने सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्योतिर्मठ क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए वैज्ञानिक जोखिम आकलन और सतत निगरानी अनिवार्य है। उन्होंने भूमि की गतिविधियों का वास्तविक समय (रियल टाइम) में पता लगाने के लिए अत्याधुनिक मॉनिटरिंग उपकरण शीघ्र स्थापित करने के निर्देश दिए। असवाल ने आश्वस्त किया कि यदि राज्य सरकार को किसी भी प्रकार की तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी, तो एनडीएमए हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने पुनर्निर्माण कार्यों के लिए उपलब्ध बजट और उसकी उपयोगिता की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा ज्योतिर्मठ पुनरुत्थान परियोजना के लिए स्वीकृत राशि में से 292 करोड़ रुपये की पहली किश्त मई 2025 में प्राप्त हो गई थी। इस राशि से भूधंसाव प्रभावित क्षेत्रों में ढाल स्थिरीकरण, टो प्रोटेक्शन, सीवर नेटवर्क और ड्रेनेज जैसे महत्वपूर्ण कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं।

बैठक में चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि क्षेत्र में असुरक्षित घोषित किए गए 55 भवनों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एनडीएमए ने इस कार्य में तेजी लाने को कहा है ताकि मानसून या अन्य प्राकृतिक कारणों से होने वाले संभावित जोखिमों को समय रहते कम किया जा सके। इसके अलावा, बैठक में 2025 की विभिन्न आपदाओं के बाद स्वीकृत 811 करोड़ रुपये के बजट के प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा की गई, जिसकी पहली किश्त राज्य को प्राप्त हो चुकी है।

 

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