चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी संकट में तब्दील होता दिख रहा है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के खिलाफ असंतोष अब बंद कमरों की बैठकों से निकलकर सार्वजनिक बयानबाजी तक पहुंच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा स्थित आवास पर लगातार दूसरे दिन दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा, जिससे यह साफ हो गया है कि पार्टी के भीतर अब नेतृत्व परिवर्तन और 2027 के चुनाव चेहरे को लेकर आर-पार की जंग छिड़ गई है।
चन्नी को कांग्रेस कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किए जाने के बाद उनके आवास पर जिस तरह से शक्ति प्रदर्शन हो रहा है, उसे राजा वडिंग के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है। इस बैठक में पहुंचे कांग्रेस नेता तरसेम सिंह डीसी ने सीधे तौर पर वडिंग की नेतृत्व क्षमता पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजा वडिंग के नेतृत्व में कांग्रेस दोबारा सरकार नहीं बना सकती क्योंकि आम जनता का उन्हें समर्थन प्राप्त नहीं है। तरसेम ने यह भी दावा किया कि पंजाब के लोग अब चरणजीत सिंह चन्नी को अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और जनता की मांग थी कि प्रदेश अध्यक्ष बदला जाए।
संगठन में वडिंग के खिलाफ बढ़ता रोष
बैठक में शामिल कई पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने संगठन की कमान वडिंग के हाथों में बरकरार रखने पर कड़ा एतराज जताया है। नेताओं का तर्क है कि 2022 की चुनावी हार और उसके बाद के घटनाक्रमों को देखते हुए कार्यकर्ताओं को नेतृत्व में बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन हाईकमान ने पुराने ढांचे को ही बनाए रखकर गलत संदेश दिया है। चन्नी कैंप के नेताओं का मानना है कि यदि मौजूदा नेतृत्व के साथ ही पार्टी आगे बढ़ी, तो जमीनी स्तर पर कांग्रेस की वापसी लगभग असंभव हो जाएगी।
मनीष तिवारी की नाराजगी ने बढ़ाई मुश्किलें
पंजाब कांग्रेस की इस आग में चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी की नाराजगी ने घी डालने का काम किया है। चुनाव समितियों से बाहर किए जाने के बाद तिवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी असुरक्षा और पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि वे पिछले 45 वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान में व्यक्तियों और संस्थाओं के भीतर असुरक्षा की भावना घर कर गई है। तिवारी का यह बयान सीधे तौर पर पार्टी के शीर्ष फैसलों और प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर एक तीखा प्रहार माना जा रहा है।
रणनीतिक मोर्चेबंदी और दिल्ली की हलचल
उधर, पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा की दिल्ली में सक्रियता ने नई अटकलों को जन्म दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, रंधावा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर मुलाकात की है। हालांकि इस मुलाकात के उद्देश्यों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसे पंजाब कांग्रेस के भीतर मचे घमासान और असंतोष के एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पंजाब कांग्रेस इस समय स्पष्ट रूप से तीन-चार अलग-अलग शक्ति केंद्रों में बंट चुकी है। एक ओर राजा वडिंग संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं, तो दूसरी ओर चरणजीत सिंह चन्नी अपने दलित समीकरण और पूर्व मुख्यमंत्री के अनुभव के साथ चुनौती पेश कर रहे हैं। इस बीच मनीष तिवारी और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे वरिष्ठ नेताओं का अपनी उपेक्षा से नाराज होना पार्टी के लिए घातक साबित हो सकता है। यदि कांग्रेस हाईकमान ने जल्द ही दखल देकर डैमेज कंट्रोल नहीं किया, तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में बिखराव की यह प्रक्रिया खुली बगावत का रूप ले लेगी। सत्ता की यह जंग अब पूरी तरह व्यक्तिगत टकराव में बदल चुकी है।
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