Punjab: नशा मुक्ति के बाद अब पुनर्वास पर जोर, पंजाब के 13 जिलों में शुरू हुईं नारकोटिक्स एनोनिमस की बैठकें

चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने राज्य में नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में नशे के इलाज के बाद पीड़ितों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘नारकोटिक्स एनोनिमस’ (NA) की बैठकें शुरू की गई हैं। वर्तमान में पंजाब के 13 जिलों में ये बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य नशे से उबर रहे व्यक्तियों को मानसिक और सामाजिक सहारा प्रदान करना है।

लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (LMHP) के साथ मिलकर नारकोटिक्स एनोनिमस की ‘अस्पताल और संस्थान’ (H&I) टीमें सरकारी नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में जागरूकता और रिकवरी सत्र आयोजित कर रही हैं। यह कार्यक्रम लुधियाना, श्री मुक्तसर साहिब, रूपनगर और मानसा सहित 13 जिलों में सफलतापूर्वक चल रहा है। इन बैठकों में नशे की लत छोड़ चुके लोग अपने अनुभव और संघर्ष साझा करते हैं, जिससे नए मरीजों में विश्वास पैदा होता है कि नशा पूरी तरह छोड़ा जा सकता है।

साझा अनुभव ही सबसे बड़ी ताकत
नारकोटिक्स एनोनिमस 1953 में स्थापित एक वैश्विक संस्था है, जो 12-चरणीय कार्यक्रम के माध्यम से नशा मुक्त जीवन जीने में मदद करती है। इस कार्यक्रम का मुख्य सिद्धांत यह है कि एक पूर्व व्यसनी अपनी आपबीती सुनाकर दूसरे पीड़ित की सबसे बेहतर मदद कर सकता है। श्री मुक्तसर साहिब के एक व्यक्ति ने बताया कि वह एक सप्ताह या महीने के लिए नशा छोड़ सकता था, लेकिन एनए बैठकों ने उसे स्थायी रूप से नशे से दूर रहने में मदद की। उसने कहा, “जब मैं देखता हूं कि मेरे जैसे संघर्ष करने वाले लोग आज नशा मुक्त हैं, तो मुझे भी प्रेरणा मिलती है।”

अकेलेपन और दोबारा नशा करने की प्रवृत्ति पर प्रहार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नशा मुक्ति के बाद सबसे बड़ी चुनौती अकेलापन होता है। केंद्र से बाहर निकलने के बाद मरीज अक्सर खुद को अकेला महसूस करते हैं, जिससे दोबारा नशा शुरू करने (रिलैप्स) की संभावना बढ़ जाती है। नारकोटिक्स एनोनिमस उन्हें एक ऐसा नेटवर्क देता है जहाँ वे बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकते हैं। लुधियाना नशा मुक्ति केंद्र के एक मरीज जगपाल (परिवर्तित नाम) ने कहा कि दूसरों की कहानियों ने उसके भीतर एक सकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा की और उसे अपनी स्थिति सुधारने के लिए प्रेरित किया।

नारकोटिक्स एनोनिमस (NA) बैठकों के मुख्य लाभ

  • समान अनुभव वाला समूह: यहाँ पीड़ित उन लोगों से बात करते हैं जो उसी दौर से गुजर चुके हैं, जिससे आपसी समझ बढ़ती है।

  • पहचान की गोपनीयता: सदस्यों की पहचान गुप्त रखी जाती है, जिससे वे बिना किसी सामाजिक डर के अपनी समस्याएं साझा कर पाते हैं।

  • नॉन-जजमेंटल स्पेस: यहाँ किसी की आलोचना नहीं की जाती, बल्कि केवल सहयोग और समर्थन दिया जाता है।

  • नियमित निगरानी: बैठकों में नियमित उपस्थिति नशे से दूर रहने की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

विशेषज्ञों की राय
मुक्तसर नशा मुक्ति केंद्र के मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता परमिंदर सिंह ने बताया कि एनए एक बेहतरीन मंच है क्योंकि इसके सदस्य एक व्यसनी की पीड़ा को गहराई से समझते हैं। लुधियाना केंद्र की काउंसलर अमनप्रीत कौर ने कहा कि समूह चिकित्सा से मरीजों का आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि बैठकों में न आना दोबारा नशा शुरू करने का शुरुआती संकेत हो सकता है, इसलिए नियमितता अनिवार्य है।

मानसा और मुक्तसर के समन्वयकों ने बताया कि वे जिला प्रशासन के साथ मिलकर इन बैठकों का दायरा बढ़ा रहे हैं। सदस्यता के लिए एकमात्र शर्त नशा छोड़ने की इच्छा है। अब कई ऐसे लोग जो लंबे समय से नशे से दूर हैं, स्वयंसेवक के रूप में नए प्रतिभागियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आने वाले समय में इस नेटवर्क को ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित करने की योजना है ताकि पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त बनाया जा सके।

 

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