देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के भीतर ऊर्जा और ईंधन की बचत को लेकर कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। वैश्विक स्तर पर जारी संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए राज्य सरकार ने सरकारी कामकाज से लेकर आम जनमानस की जीवनशैली में बदलाव लाने के लिए कई अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुधारों को मंजूरी दी है।
बैठक के दौरान पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के वर्तमान हालातों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा दबाव बनाया है। इसका सीधा असर ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की लागत पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र हित में किए गए आह्वान को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने इन महत्वपूर्ण संशोधनों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का फैसला किया है।
मंत्रिमंडल ने तय किया है कि मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के वाहन काफिले (फ्लीट) में वाहनों की संख्या अब आधी कर दी जाएगी। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ घोषित किया जाएगा, जिस दिन मुख्यमंत्री और मंत्री अपने घर से ही ‘वर्क फ्रॉम होम’ के जरिए कार्य करेंगे। सरकारी विभागों में अब बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दी जाएगी और निजी क्षेत्र को भी घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रशासन ने ‘एक अधिकारी, एक वाहन’ की नीति भी लागू की है, जिसके तहत कई विभागों का जिम्मा संभालने वाले अधिकारी अब एक दिन में अधिकतम एक ही सरकारी वाहन का उपयोग कर सकेंगे।
परिवहन क्षेत्र में सुधार के लिए जल्द ही एक प्रभावी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पॉलिसी लाई जाएगी। निर्णय लिया गया है कि नए सरकारी वाहनों की खरीद में कम से कम 50 प्रतिशत वाहन अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक होंगे। राज्य में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाएगा। वहीं, सरकारी स्तर पर होने वाली विदेश यात्राओं को सीमित करने और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। उत्तराखंड में डेस्टिनेशन वेडिंग को बढ़ावा देने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था की जाएगी।
आर्थिक मोर्चे पर सरकार ने ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ और ‘मेड इन स्टेट’ जैसे जन-जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत नागरिकों को एक साल तक सोने की खरीद सीमित करने और स्थानीय उत्पादों का उपयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सरकारी खरीद में ‘मेक इन इंडिया’ नियमों का सख्ती से पालन होगा। आम जनता के स्वास्थ्य और विदेशी मुद्रा की बचत के लिए खाद्य तेल की खपत घटाने का अभियान भी चलाया जाएगा। स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीनों में तेल के उपयोग की समीक्षा होगी और ढाबा संचालकों को ‘लो-ऑयल मेन्यू’ के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
कृषि के क्षेत्र में सरकार प्राकृतिक खेती और ‘जीरो बजट फार्मिंग’ पर जोर देगी। किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य का प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शनों को मिशन मोड में विस्तार दिया जाएगा। ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के तहत रूफटॉप सोलर और ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर गैस को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, खनन, सौर और बिजली परियोजनाओं की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति अब 60 दिनों के भीतर प्रस्तावों को अपनी अनुमति प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन कदमों से उत्तराखंड आत्मनिर्भरता और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक आदर्श राज्य बनकर उभरेगा।