देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और जनहित से जुड़े 16 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है। इस बैठक में युवाओं, सरकारी कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों और किसानों के लिए कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। मंत्रिमंडल ने पुलिस भर्ती से लेकर स्वरोजगार योजनाओं तक में महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की है।
बैठक में कार्मिक विभाग के अंतर्गत पुलिस, पीएसी, अग्निशमन और प्लाटून कमांडर जैसे पदों पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। सिपाही और उप निरीक्षक पदों के लिए पूर्व में बनाई गई नियमावली में आयु सीमा घटने के कारण जो अभ्यर्थी प्रभावित हुए थे, उन्हें अब दोबारा मौका देने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए नियमों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। वहीं, वन विभाग के मुख्य प्रशासनिक पदों पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम सेवा अवधि को 25 वर्ष से घटाकर 22 वर्ष कर दिया गया है, जिससे यह अब कार्मिक विभाग की व्यवस्था के अनुरूप हो गया है।
न्याय विभाग के कर्मचारियों के लिए भी कैबिनेट ने बड़ी राहत की घोषणा की है। अब न्यायिक कर्मचारी 10 लाख रुपये तक का सॉफ्ट लोन अत्यंत मामूली ब्याज दर पर प्राप्त कर सकेंगे। गृह विभाग के अंतर्गत उत्तराखंड होमगार्ड के लिए नई नियमावली को मंजूरी दी गई है। साथ ही, देश में भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद पुलिस और संबंधित विभागों के प्रशिक्षण के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति को भी हरी झंडी दिखाई गई है।
राज्य के पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘उत्तराखंड वीर उद्यमी योजना’ और ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’ में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन योजनाओं में अब 10 प्रतिशत लक्ष्य पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा, इन्हें सामान्य से 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी भी दी जाएगी। नियोजन विभाग के तहत ‘सेतु’ (SETU) आयोग के ढांचे और कामकाज को लेकर भी मंत्रिमंडल ने अपनी सहमति दे दी है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के तहत राज्य में 2.2 लाख मैट्रिक टन अनाज खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गेहूं और धान की खरीद पर मंडी शुल्क को लेकर तय किया गया है कि राज्य सरकार भी उतना ही प्रतिशत मंडी शुल्क देगी जितना भारत सरकार द्वारा दिया जा रहा है। ऊर्जा विभाग के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है कि बिजली सब्सिडी का लाभ उपभोक्ताओं को 31 मार्च 2025 तक ही प्राप्त होगा।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों में, लोक निर्माण विभाग में एक करोड़ रुपये से अधिक के परामर्श (कंसल्टेंसी) कार्यों के प्रस्तावों को पास किया गया। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के प्रीमियम से संबंधित प्रस्तुतीकरण दिया गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग में एडेड स्कूलों की व्यवस्थाओं के अध्ययन के लिए एक उप-समिति बनाने का निर्णय लिया गया है। अंत में, मंत्रिमंडल ने पांचवें विधानसभा सत्र के अवसान (सत्रावसान) को भी अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। इन फैसलों से राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था में व्यापक सुधार की उम्मीद है।