गुरदासपुर। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन की ओर से बुलाई गई अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण वीरवार को सरकारी बसों का संचालन पूरी तरह ठप रहा। इस हड़ताल का व्यापक असर गुरदासपुर और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिला, जहां बस डिपो से एक भी सरकारी बस बाहर नहीं निकली। यूनियन ने अपने गिरफ्तार साथियों की तत्काल रिहाई और अपनी अन्य लंबित मांगों को लेकर इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। सुबह से ही सरकारी बसों के पहिये थम जाने के कारण पूरे प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है।
इस अचानक हुई हड़ताल का सबसे सीधा और कड़ा प्रहार आम जनता पर पड़ा है। विशेष रूप से वे महिला यात्री, जो पंजाब सरकार द्वारा दी गई मुफ्त यात्रा योजना का लाभ उठाती हैं, उन्हें भारी असुविधा और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। सरकारी बसें उपलब्ध न होने के कारण इन महिलाओं को विवश होकर निजी बसों का सहारा लेना पड़ा और अपनी जेब से भारी किराया खर्च कर सफर करना पड़ा। बस अड्डों पर खड़ी कई महिला यात्रियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि हड़ताल की पूर्व सूचना न होने के कारण उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी संचालकों को मनमाना किराया देना पड़ रहा है।
आम यात्रियों के अलावा, रोजाना कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और स्कूल-कॉलेज के छात्रों के लिए भी यह दिन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। समय पर बसें न मिलने के कारण छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हुआ और कई कर्मचारी अपने दफ्तरों में देरी से पहुंचे। बस अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई, जो बसों के इंतजार में घंटों खड़ी रही। सरकारी बसों की अनुपस्थिति का निजी बस संचालकों ने जमकर लाभ उठाया। निजी बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी हुई नजर आईं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित हुईं।
यूनियन के नेताओं ने अपना कड़ा रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकार उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनके गिरफ्तार किए गए साथियों को सम्मानपूर्वक रिहा नहीं किया जाता और उनकी जायज मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन और चक्का जाम जारी रहेगा। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों का शोषण बंद होना चाहिए और उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। फिलहाल, रोडवेज कर्मियों की इस हड़ताल के कारण यात्रियों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं और प्रशासन पर इस विवाद को सुलझाने का भारी दबाव है।