चंडीगढ़। पंजाब के निर्माण श्रमिक, जो दशकों तक राज्य की सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और घरों का निर्माण करने के बावजूद उपेक्षित और अदृश्य नागरिक बने हुए थे, अब प्रदेश की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहे हैं। पिछली सरकारों के दौरान यह श्रमिक वर्ग प्रशासनिक देरी, गरीबी और कागजों तक सीमित कल्याणकारी योजनाओं के जाल में फंसा हुआ था। हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद इस स्थिति में एक निर्णायक और बड़ा बदलाव आया है। सरकार ने अपनी शासन व्यवस्था के दर्शन को बदलते हुए श्रमिकों को कार्यालयों के चक्कर काटने के बजाय कल्याणकारी योजनाओं को उनके द्वार तक पहुँचाने का काम किया है।
इस परिवर्तन के केंद्र में पंजाब भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड (बीओसीडब्ल्यू) का कायाकल्प है। यह बोर्ड राज्य के लगभग दो लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है। मान सरकार ने इस बोर्ड की कार्यप्रणाली में गति, गरिमा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इसमें व्यापक सुधार किए हैं। पिछली सरकारों के समय कल्याणकारी लाभों के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) में औसतन 206 दिन का समय लगता था, जिसे अब घटाकर काफी कम कर दिया गया है। साथ ही, लेबर कार्ड की वैधता जो पहले केवल एक वर्ष थी, उसे भी अब तर्कसंगत बनाया गया है ताकि श्रमिकों को बार-बार नवीनीकरण की परेशानी से न गुजरना पड़े।
भगवंत मान सरकार को विरासत में केवल प्रशासनिक देरी ही नहीं, बल्कि वर्षों की संचित उपेक्षा और गंभीर देनदारियां भी मिली थीं। सरकार ने सतही सुधारों के बजाय संरचनात्मक बदलावों को प्राथमिकता दी। इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रसूति लाभ के लिए ‘बाल आधार’ की अनिवार्यता को समाप्त करना है। नवजात बच्चों के लिए आधार कार्ड की शर्त केवल वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए लगाना न केवल तर्कहीन था, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी गलत था। इस शर्त को हटाकर सरकार ने कल्याणकारी प्रक्रिया में बुनियादी गरिमा को बहाल किया है।
पंजाब के इन सुधारों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ तकनीक का उपयोग केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि श्रमिकों की कठिनाइयों को कम करने के लिए किया जा रहा है। जो आवेदन प्रक्रिया पहले 11 चरणों से होकर गुजरती थी, उसे अब सरल बना दिया गया है। कुल 14 कल्याणकारी योजनाओं में अनावश्यक स्वीकृतियों को हटा दिया गया है। अब विभिन्न सरकारी विभाग आपस में डेटा साझा करते हैं, जिससे श्रमिकों को उन दस्तावेजों को दोबारा जमा करने की आवश्यकता नहीं होती जो सरकार के पास पहले से मौजूद हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी खत्म हुई है।
पूर्व में निर्माण श्रमिकों को शिक्षा संबंधी लाभों के लिए स्कूलों और सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे उनकी दिहाड़ी का नुकसान होता था। अब पूरी प्रणाली ऑनलाइन और तकनीक-आधारित हो गई है, जिससे आधार सत्यापन या लिंकेज के लिए कहीं जाने की आवश्यकता नहीं रह गई है। एक बार बुनियादी विवरण जमा होने के बाद प्रक्रिया स्वचालित रूप से आगे बढ़ती है। इसी तरह, स्वास्थ्य बीमा लाभ को बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है, जिसे बिना किसी कागजी कार्रवाई के अस्पतालों में आपातकालीन उपचार के लिए उपयोग किया जा सकता है।
इन सुधारों के परिणाम अब धरातल पर दिखाई दे रहे हैं। लाभों के प्रसंस्करण का औसत समय 203 दिनों से 64 प्रतिशत घटकर अब केवल 73 दिन रह गया है, और इसे 45 दिनों तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। कल्याणकारी राशि के वितरण में भी 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2020-21 में जहाँ 93 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे, वहीं 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में ही यह राशि बढ़कर 125 करोड़ रुपये हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस वर्ष अब तक 81,000 निर्माण श्रमिकों को लाभ मिल चुका है, जो पिछले वर्षों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।
हाल ही में आयोजित ‘किरत’ सम्मेलन इस नए दृष्टिकोण का प्रतीक था, जहाँ बीओसीडब्ल्यू हैंडबुक लॉन्च की गई ताकि योजनाओं को जमीनी स्तर पर और मजबूती दी जा सके। श्रम मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने इन सुधारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब न केवल विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, बल्कि उन श्रमिकों का सम्मान भी कर रहा है जो इन्हें बनाते हैं। उन्होंने सभी निर्माण श्रमिकों से बोर्ड के साथ पंजीकरण कराने और योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
पंजाब के इन सुधारों को अब पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब कई राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर श्रम अधिकारों की अनदेखी हो रही है, पंजाब ने श्रम कल्याण को शासन के केंद्र में रखा है। निर्माण श्रमिकों की जरूरतों को प्राथमिकता देकर और समय पर लाभ सुनिश्चित कर पंजाब एक मिसाल कायम कर रहा है। भगवंत मान सरकार ने यह साबित कर दिया है कि जब कल्याणकारी योजनाओं को विश्वास और सम्मान के साथ लागू किया जाता है, तो वे केवल खैरात नहीं बल्कि न्याय बन जाती हैं। आज पंजाब के निर्माण श्रमिकों को समय पर बच्चों की फीस, चिकित्सा सहायता और बेटियों की शादी के लिए शगुन जैसी सुविधाएं बिना किसी परेशानी के मिल रही हैं, जो राज्य के समावेशी विकास का प्रमाण है।
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