देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास से ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के करीब आठ लाख स्कूली बच्चों को वर्चुअल संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज की शुभकामनाएं दीं। साथ ही त्योहारों के सांस्कृतिक महत्व, स्वच्छता, सुरक्षा, पढ़ाई और जीवन के लक्ष्यों को लेकर बच्चों को प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश के बच्चों से लगातार संवाद बनाए रखना, उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और शिक्षा, संस्कृति, नैतिक मूल्यों तथा जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन देना है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर शहरों और गांवों तक के विद्यार्थी एक साथ इस संवाद का हिस्सा बने।
बच्चों से आत्मीय बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके परिवार का हालचाल पूछा और दीपावली की तैयारियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने तथा सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का माध्यम भी हैं। धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज आपसी प्रेम, सहयोग और पारिवारिक संबंधों का महत्व समझाते हैं।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से दीपावली पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने और घर की साफ-सफाई में परिवार का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छता को दैनिक जीवन की आदत बनाना जरूरी है। सभी के छोटे-छोटे प्रयास प्रदेश और देश को स्वच्छ बनाने में योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को मिट्टी के दीये जलाने और स्थानीय कुम्हारों व कारीगरों के उत्पाद खरीदने के लिए भी प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे कारीगरों और उनके परिवारों की आजीविका को प्रोत्साहन मिलेगा।
त्योहारों के दौरान सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने बच्चों से पटाखों से दूर रहने और दीये व फुलझड़ियां जलाते समय बड़ों की देखरेख में रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों का आनंद तभी है, जब सभी सुरक्षित रहें।
विद्यार्थियों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने पढ़ाई के साथ खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और नई चीजें सीखने पर भी ध्यान देने को कहा। उनके अनुसार, जीवन में सफलता के लिए मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ कार्यक्रम को भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक की मदद से और उपयोगी बनाया जाएगा। इससे बच्चों को उपयोगी और प्रेरक जानकारियां उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इससे पहले ढाई लाख से अधिक विद्यार्थियों ने निबंध के माध्यम से आयोजित संवाद कार्यक्रम में उत्तराखंड के विकास को लेकर अपने विचार और सुझाव साझा किए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के सुझाव महत्वपूर्ण हैं और उपयोगी विचारों पर भविष्य की योजनाओं तथा नीतियों के निर्माण में भी विचार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को ‘विकल्प रहित संकल्प’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि इसका आशय लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने बच्चों से चुनौतियों से घबराए बिना अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि बच्चों की प्रतिभा, परिश्रम और रचनात्मक सोच विकसित उत्तराखंड और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस अवसर पर सचिव शिक्षा ज्योति यादव, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे और संयुक्त निदेशक गोविंद राम जायसवाल भी मौजूद रहे।