चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अभी कई महीने बाकी हैं, लेकिन राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी ने 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुनावी तैयारी का आगाज कर दिया है। कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच मतभेद दूर करने में जुटी है, जबकि शिरोमणि अकाली दल भी कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुका है। दूसरी ओर, भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं जारी हैं। पंथक राजनीति से जुड़े अन्य दल भी अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
आप ने तीनों क्षेत्रों को दिया प्रतिनिधित्व
आम आदमी पार्टी ने 31 अक्टूबर को जारी अपनी पहली सूची में मालवा, माझा और दोआबा—तीनों क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया है। पार्टी ने उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी अभियान को गति देने की कोशिश की है। आप ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी सबसे पहले उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। इस बार भी पार्टी ने शुरुआती बढ़त लेने की रणनीति अपनाई है।
परगट सिंह की नियुक्ति के बाद कांग्रेस में बैठकों का दौर
कांग्रेस फिलहाल उम्मीदवारों की घोषणा के बजाय संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने पर ध्यान दे रही है। प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह की नियुक्ति के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश तेज हुई है।
26 अक्टूबर को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने प्रदेश के नेताओं के साथ बैठक कर संगठन और चुनावी तैयारियों पर चर्चा की। इसके बाद 31 अक्टूबर को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की मौजूदगी में पंजाब के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। कांग्रेस की कोशिश गुटबाजी और आपसी मतभेद कम कर एकजुटता का संदेश देने की है।
चार नवंबर को संगरूर में प्रस्तावित राहुल गांधी की रैली को भी चुनावी गतिविधियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पार्टी में उम्मीदवारों के चयन को लेकर विचार-विमर्श जारी है।
अकाली दल की तैयारियां तेज, गठबंधन पर सस्पेंस
शिरोमणि अकाली दल कुछ सीटों पर रैलियों के दौरान उम्मीदवारों की घोषणा कर चुका है। पार्टी घर-घर संपर्क अभियान चलाने और प्रदेशव्यापी बस यात्रा की तैयारी में जुटी है। इसके अलावा नवंबर के मध्य तक चुनावी घोषणापत्र जारी करने और आठ दिसंबर को मोगा के किल्ली चहलां में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। भाजपा की ओर से सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत दिए जा रहे हैं। वहीं, सुखबीर सिंह बादल अकेले चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं, हालांकि उन्होंने समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
पंथक दल भी तलाश रहे राजनीतिक जमीन
ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व वाला अकाली दल (पुनर सुरजीत) अपनी अलग पहचान बनाने और पंथक संगठनों के साथ तालमेल की संभावनाएं तलाश रहा है। वहीं, अमृतपाल सिंह के समर्थकों की ओर से गठित अकाली दल (वारिस पंजाब दे) भी चुनावी गतिविधियां बढ़ा रहा है।
फिलहाल पंजाब की राजनीति में उम्मीदवारों की अगली सूचियों, कांग्रेस की चुनावी रणनीति और भाजपा-अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन दलों के फैसले राज्य के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
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