चंडीगढ़। पंजाब के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने राज्य में नशे और संगठित अपराध के मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन तथा कांग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने दावा किया कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार नशा तस्करी और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है, जबकि भाजपा अपने शासन वाले राज्यों में नशे की समस्या पर जवाब देने के बजाय पंजाब की राजनीति कर रही है।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीमा ने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल में पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद की समस्या बढ़ी। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी 2017 में नशे के खिलाफ कार्रवाई के वादे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन 2022 तक अपने पांच साल के कार्यकाल में वह इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर सकी।
चीमा के मुताबिक, आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद नशा तस्करों और अपराधियों के खिलाफ अभियान तेज किया गया। उन्होंने बताया कि सरकार ने सत्ता संभालने के बाद एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स का गठन किया। इसके तहत विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई, अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और अवैध हथियार बरामद किए गए। विदेश भाग चुके आरोपियों को वापस लाने के प्रयास भी किए गए।
मंत्री ने दावा किया कि गैंगस्टर और अपराध विरोधी अभियानों के दौरान 2,105 घोषित भगोड़ों को पकड़ा गया है, जबकि 81,499 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने सरकार के नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी और कार्रवाई की क्षमता मजबूत हुई है।
चीमा ने नशे से जुड़े मामलों के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 31 मार्च 2025 से राज्य में 68,545 मामले दर्ज किए गए और करीब 90 हजार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई में लगभग 450 किलोग्राम हेरोइन, 23 करोड़ रुपये से अधिक की ड्रग मनी, 67 लाख से ज्यादा नशीले कैप्सूल, करीब 4,200 इंजेक्शन और 84 किलोग्राम नशीला पाउडर जब्त किया गया।
भाजपा को दूसरे राज्यों में नशे की स्थिति पर जवाब देने की चुनौती देते हुए चीमा ने 25 अक्टूबर को प्रकाशित एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला दिया। उनके मुताबिक, रिपोर्ट में पंजाब में नशे के इस्तेमाल में 5.5 प्रतिशत कमी का दावा किया गया, जबकि दिल्ली में 28 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 18 प्रतिशत, हरियाणा में 42 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 51 प्रतिशत वृद्धि बताई गई। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े आप सरकार के अपने सर्वेक्षण के नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के आंकड़ों पर आधारित हैं।
चीमा ने बिहार के डीजीपी कुंदन कृष्णन के कथित बयान का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, डीजीपी ने अन्य राज्यों को पंजाब के नशा विरोधी प्रयासों से सीख लेने की बात कही थी।
गुजरात का उदाहरण देते हुए चीमा ने भाजपा के शासनकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन दशक से अधिक समय तक भाजपा के शासन के बावजूद गुजरात नशीले पदार्थों की तस्करी का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा को पंजाब पर सवाल उठाने से पहले अपने शासन वाले राज्यों में नशे की समस्या का जवाब देना चाहिए।
चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार युवाओं को नशे से बचाने और तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि नशा तस्करों, गैंगस्टरों और संगठित अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।