UN: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दावेदारी में AI और समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देगा भारत – The Hill News

UN: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दावेदारी में AI और समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देगा भारत

संयुक्त राष्ट्र। भारत ने वर्ष 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अस्थायी सदस्यता हासिल करने की अपनी कोशिश में समुद्री सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने सुरक्षा परिषद की उच्चस्तरीय चर्चा में कहा कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल मानव सुरक्षा को मजबूत करने और समुद्री मार्गों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए होना चाहिए।

पर्वथानेनी ने कहा कि भारत की कोशिश साझा समुद्री क्षेत्रों को टकराव का केंद्र बनाने के बजाय उन्हें सुरक्षित और सहयोगपूर्ण बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक से अवसरों का विस्तार होना चाहिए, न कि देशों और समाजों के बीच असमानता बढ़नी चाहिए। भारत का मानना है कि विकासशील देशों को भी नई तकनीकों, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमताओं तक पर्याप्त पहुंच मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने समुद्री ढांचे की सुरक्षा कर सकें और तकनीकी शासन से जुड़े वैश्विक फैसलों में प्रभावी भागीदारी निभा सकें।

भारत 2028-29 के दो वर्षीय कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट का चुनाव लड़ रहा है। इस सीट के लिए मतदान जून 2027 में प्रस्तावित है। एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र उपलब्ध सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा। भारत ने जुलाई 2026 में अपनी उम्मीदवारी का अभियान शुरू किया था।

समुद्री मार्गों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर जोर

भारतीय राजदूत ने समुद्र में बढ़ते साइबर खतरों और वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले हमलों को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों से नाविकों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है और वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित होती है। इसका आर्थिक बोझ विकासशील देशों पर अधिक पड़ सकता है, क्योंकि इससे परिवहन लागत बढ़ती है और व्यापार में अनिश्चितता पैदा होती है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता, वैध व्यापारिक गतिविधियों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसी संदर्भ में होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों के समुद्री बारूदी सुरंगों से टकराने की खबरों ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को फिर चर्चा में ला दिया।

AI से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान में मिलेगी मदद

पर्वथानेनी के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समुद्री निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों, रडार और जहाजों की आवाजाही से जुड़े आंकड़ों का AI की मदद से विश्लेषण कर समुद्री गतिविधियों की अधिक प्रभावी निगरानी की जा सकती है। इससे संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर खोज एवं बचाव अभियान चलाने में भी सहायता मिल सकती है।

उन्होंने भारत के सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) का उदाहरण देते हुए कहा कि समुद्री सुरक्षा के लिए विभिन्न देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और सहयोग बेहद जरूरी है। यह केंद्र समुद्री क्षेत्र से जुड़ी जानकारी साझा करने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने में सहयोग करता है।

भारतीय प्रतिनिधि ने भारत के ‘सागर’ यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास के दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत समावेशी समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।

नई तकनीक के इस्तेमाल में मानवीय निगरानी जरूरी

राजदूत ने स्वायत्त प्रणालियों और तेजी से बढ़ते स्वचालन से पैदा होने वाली चुनौतियों पर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, ऐसी तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से यह तय करना कठिन हो सकता है कि किसी घटना के लिए जिम्मेदार कौन है और जवाबदेही किसकी होगी। इससे अनजाने में तनाव बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को लागू करते समय पर्याप्त सुरक्षा उपाय, प्रभावी मानवीय निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। भारत का जोर ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने पर है, जो समुद्री सुरक्षा को मजबूत करे और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए नई चुनौतियां पैदा न करे।

 

Pls read:Punjab: परविंदर सिंह झोटा मामले में परिवार की मांगें स्वीकार, पोस्टमार्टम पर फैसला परिजनों की इच्छा पर निर्भर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *