देहरादून। उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने अनुपूरक बजट में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा शिक्षण के साथ डिजिटल माध्यम से भी पढ़ाई के अवसर उपलब्ध कराना है। सरकारी योजना से प्राथमिक विद्यालयों, माध्यमिक स्कूलों, इंटर कॉलेजों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री, ऑनलाइन कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी। इससे उन्हें पाठ्यक्रम की तैयारी के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद मिल सकती है। सरकार का जोर खासतौर पर उन दूरदराज क्षेत्रों के विद्यालयों और महाविद्यालयों तक डिजिटल सुविधाएं पहुंचाने पर है, जहां अभी इन संसाधनों की आवश्यकता है।
स्कूलों में स्मार्ट क्लास और वर्चुअल शिक्षा का विस्तार
प्रदेश में डिजिटल शिक्षा का ढांचा विकसित करने के लिए पहले से कई कदम उठाए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 4,719 विद्यालय स्मार्ट क्लास की सुविधा से जुड़े हैं, जबकि 1,340 विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त 363 विद्यालयों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) लैब उपलब्ध हैं और 266 स्कूलों में डिजिटल पुस्तकालय स्थापित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएमश्री) योजना के तहत भी तकनीक आधारित शिक्षण सुविधाओं को बढ़ाने की तैयारी है। इसके अंतर्गत 1,203 आईसीटी सुविधाएं और 2,320 स्मार्ट क्लास विकसित करने की योजना बताई गई है। वहीं, कक्षा छह से 12 तक के लगभग 1.90 लाख विद्यार्थी डिजिटल शिक्षा से जुड़ रहे हैं। शिक्षा निदेशालय से हाइब्रिड माध्यम में 840 विद्यालय वर्चुअल रूप से जुड़ते हैं।
उच्च शिक्षा संस्थानों में भी डिजिटल लर्निंग
डिजिटल शिक्षा का दायरा स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश के 119 सरकारी महाविद्यालयों में से 72 में डिजिटल लर्निंग की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इसके साथ ही राज्य के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में एक से दो कक्षाओं का संचालन डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है। सरकार की योजना इन सुविधाओं को और मजबूत करने की है, ताकि अधिक विद्यार्थियों को तकनीक आधारित शिक्षण का लाभ मिल सके।
एआई शिक्षक प्रशिक्षण परियोजना को अंतरराष्ट्रीय पहचान
उत्तराखंड में डिजिटल शिक्षा के साथ शिक्षकों के तकनीकी प्रशिक्षण पर भी काम किया जा रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से विकसित ‘बिल्डिंग फ्यूचर-रेडी टीचर थ्रू एआई’ परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। इस परियोजना को यूनेस्को के एआई फॉर एजुकेशन अवार्ड-2026 के शिक्षक प्रशिक्षण वर्ग में दुनिया की शीर्ष छह परियोजनाओं में शामिल किया गया। इसकी घोषणा स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट-2026 में की गई।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार, राज्य सरकार स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक डिजिटल लर्निंग को प्राथमिकता दे रही है। उनका कहना है कि स्मार्ट क्लास और वर्चुअल माध्यम से पढ़ाई की सुविधाएं पहले से संचालित हैं। अब उन दूरस्थ क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों और महाविद्यालयों को भी डिजिटल शिक्षा से जोड़ने पर ध्यान दिया जाएगा, जहां इसकी विशेष जरूरत है।
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