चंडीगढ़। बंदी सिखों की रिहाई के मुद्दे को लेकर गठित चार सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात कर अपनी मांगें और सुझाव उनके सामने रखे। कमेटी में गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह शामिल हैं। बैठक के दौरान बंदी सिखों से जुड़े मामलों और उनकी रिहाई की प्रक्रिया को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
कमेटी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के समक्ष बंदी सिखों की रिहाई से जुड़े विभिन्न पहलुओं को रखा और इस दिशा में सरकार से आवश्यक कदम उठाने की अपील की। सदस्यों का कहना था कि लंबे समय से इस मुद्दे को उठाया जा रहा है और इसके समाधान के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रभावी पहल की जरूरत है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कमेटी के सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुनने के बाद सरकार की ओर से उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है और बंदी सिखों की रिहाई के मुद्दे का जल्द से जल्द उचित एवं कानूनी समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुराने लंबित मामलों पर कार्रवाई का भरोसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जायज और कानूनी कदमों को पिछली सरकारों के कार्यकाल में लंबे समय तक नहीं उठाया गया, उन्हें उनकी सरकार प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस मामले से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाएगी।
मान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मामले को सिर्फ चर्चा तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उपलब्ध कानूनी रास्तों के जरिए इसे समाधान की दिशा में आगे ले जाना है। इसके लिए संबंधित पक्षों की बात को भी ध्यान में रखा जाएगा।
कानून के दायरे में उठाए जाएंगे जरूरी कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार न्याय के पक्ष में खड़ी रही है और बंदी सिखों से जुड़े मामले में भी कानून के दायरे में रहते हुए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
उन्होंने कमेटी के सदस्यों को आश्वासन दिया कि सरकार इस विषय को संवेदनशीलता के साथ देख रही है। बैठक में रखे गए सुझावों और मांगों को आगे की कार्रवाई के दौरान ध्यान में रखने की बात भी कही गई।
आगे की प्रक्रिया को लेकर बैठक अहम
मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी इंटरनेट मीडिया के माध्यम से भी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय को लेकर गंभीर और संवेदनशील है। कमेटी के साथ हुई बातचीत को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बंदी सिखों की रिहाई के लिए कमेटी लंबे समय से प्रयास करती रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ हुई यह बैठक इस मुद्दे पर सरकार के रुख और आगे की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब कमेटी की ओर से उठाई गई मांगों और सरकार की ओर से किए गए आश्वासन के आधार पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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