नई दिल्ली, 3 अक्टूबर। भारतीय वायुसेना दिवस से पहले वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने और भविष्य की तकनीकी जरूरतों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि यदि स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) सहित अन्य संबंधित कार्यक्रमों में देरी होती है, तो वायुसेना को वैकल्पिक लड़ाकू विमान प्लेटफॉर्म पर विचार करना पड़ सकता है।
भारतीय वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या में कमी की चुनौती का सामना कर रही है। 42 स्क्वाड्रनों की अधिकृत संख्या की तुलना में वर्तमान संख्या इससे कम है। पुराने विमानों के चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर होने और नए विमानों के शामिल होने की गति के बीच अंतर को कम करना वायुसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा है।
हर साल 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अनुसार, आने वाले वर्षों में लड़ाकू विमानों की संख्या में कमी को नियंत्रित करने के लिए वायुसेना को हर साल करीब 36 से 40 नए लड़ाकू विमान शामिल करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने आधुनिक युद्ध में वायु शक्ति के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि देश को अपनी हवाई क्षमता को और मजबूत करने की जरूरत है।
AMCA को भारत के भविष्य के पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एलसीए मार्क-2 जैसे स्वदेशी विमान कार्यक्रम भी वायुसेना के भविष्य के बेड़े का हिस्सा बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, इन विमानों की पर्याप्त संख्या में उपलब्धता में समय लग सकता है।
एआई और ड्रोन तकनीक पर जोर
वायुसेना प्रमुख ने भविष्य के सैन्य अभियानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना को एआई आधारित क्षमताओं से मजबूत करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल वायुसेना की संचालन क्षमता और निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन को भी भविष्य की सैन्य क्षमताओं का हिस्सा बताया। वायुसेना के अनुसार, इन तकनीकों को अलग-थलग इस्तेमाल करने के बजाय मौजूदा सैन्य प्रणालियों और अन्य हथियारों के साथ एकीकृत करके इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।
114 राफेल विमानों की खरीद पर प्रक्रिया जारी
वायुसेना के आधुनिकीकरण के लिए प्रस्तावित 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीद भी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने संकेत दिया कि यह सौदा मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान अंतिम रूप ले सकता है, हालांकि कीमत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चल रही प्रक्रिया के कारण अंतिम निर्णय कई कारकों पर निर्भर करेगा। भारत ने फरवरी में 114 राफेल विमानों की खरीद के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी थी और बातचीत जारी है।
रूस के एसयू-57 प्रस्ताव पर अभी फैसला नहीं
पांचवीं पीढ़ी के वैकल्पिक लड़ाकू विमान के सवाल पर वायुसेना प्रमुख ने बताया कि रूस ने भारत को एसयू-57 विमानों की पेशकश की है, लेकिन इस प्रस्ताव पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वदेशी क्षमता बढ़ाना भारतीय वायुसेना की दीर्घकालिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।