बेंगुलुरु।
भारतीय वायुसेना की प्रशिक्षण क्षमताओं को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल होने जा रही है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अपने बहुप्रतीक्षित स्वदेशी एचटीटी-40 (HTT-40) बेसिक ट्रेनर विमानों का पहला बैच वायुसेना को सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार है। रविवार को रक्षा अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि इन विमानों के बेड़े में शामिल होने से नए पायलटों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया काफी सुगम और प्रभावी हो जाएगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, शुरुआती खेप में तीन एचटीटी-40 विमान तैयार किए गए हैं। इनमें से दो विमानों का निर्माण एचएएल की बेंगलुरु स्थित इकाई में हुआ है, जबकि एक विमान नासिक स्थित कारखाने में तैयार किया गया है। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना ने लगभग तीन साल पहले 6,838 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ 70 बेसिक ट्रेनर विमानों का ऑर्डर दिया था। हालांकि, वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं और इंजनों की कमी के कारण इस परियोजना में कुछ विलंब हुआ था। अनुबंध के मुताबिक, एचएएल को मौजूदा वित्तीय वर्ष में 12 विमानों की आपूर्ति करनी थी, लेकिन इंजन न मिल पाने के कारण अब तक एक भी विमान नहीं दिया जा सका था।
इस बाधा को दूर करने में अमेरिकी कंपनी हनीवेल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। हनीवेल ने हाल ही में अपने ‘टीपीई331-12बी’ (TPE331-12B) टर्बोप्रॉप इंजनों का पहला जत्था एचएएल को सौंप दिया है। कंपनी ने भविष्य में भी इंजनों की निर्बाध आपूर्ति का भरोसा दिलाया है। बता दें कि चार साल पहले इंजनों और किट्स की खरीद के लिए 100 मिलियन डॉलर का एक अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ था। इस सौदे की खास बात यह है कि हनीवेल 16 इंजन सीधे तौर पर तैयार स्थिति में उपलब्ध कराएगी, जबकि शेष इंजनों का निर्माण तकनीकी हस्तांतरण (ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी) के माध्यम से भारत में एचएएल द्वारा ही किया जाएगा।
रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को गति देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले साल नासिक में एचटीटी-40 विमानों की नई प्रोडक्शन लाइन का शुभारंभ किया था। इस विस्तार के बाद अब एचएएल की क्षमता इतनी बढ़ गई है कि वह बेंगलुरु और नासिक की इकाइयों को मिलाकर सालाना 20 विमानों का उत्पादन कर सकता है। इससे वायुसेना की 70 विमानों की मांग को समय से पूरा करने में मदद मिलेगी।
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के नए पायलटों की शुरुआती यानी स्टेज-I की ट्रेनिंग स्विट्जरलैंड में बने पिलाटस पीसी-7 (PC-7 MkII) विमानों पर की जाती है। यह प्रशिक्षण सभी पायलटों के लिए अनिवार्य होता है, जिसके बाद उन्हें उनकी योग्यता के आधार पर फाइटर, ट्रांसपोर्ट या हेलिकॉप्टर विंग में भेजा जाता है। फाइटर पायलटों के लिए स्टेज-II की ट्रेनिंग स्वदेशी ‘किरण’ जेट ट्रेनर्स पर होती है, और अंतिम चरण का प्रशिक्षण ब्रिटिश ‘हॉक’ एडवांस्ड जेट विमानों पर संपन्न होता है। एचटीटी-40 के आने से बेसिक ट्रेनिंग के लिए विदेशी विमानों पर निर्भरता कम होगी और देश में ही पायलटों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण मिल सकेगा।