नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 400 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय पर्यटक और 37 प्रवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश कैलाश मानसरोवर की तीर्थ यात्रा पर गए थे। इस तबाही ने साल 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई जलप्रलय की भयावह यादें ताजा कर दी हैं।
भारत की मदद और सरकारी सक्रियता
इस संकट की घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर संवेदना व्यक्त की और हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया है। भारतीय वायुसेना के विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल रवाना हो रहे हैं और एनडीआरएफ की 20 टीमों को राहत कार्यों के लिए तैनात करने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सहायता के लिए 1070 हेल्पलाइन नंबर सक्रिय किया है, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने अपने पर्यटकों की जानकारी जुटाने के लिए डेटा लिंक शुरू किया है। चीन और नेपाल में स्थित भारतीय दूतावासों ने भी फंसे हुए नागरिकों के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं।
कैसे आई विनाशकारी बाढ़ और वैज्ञानिक कारण
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, तिब्बत क्षेत्र में आए 4.4 तीव्रता के भूकंप के ठीक तीन मिनट बाद यह बाढ़ आई। विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप के झटकों के कारण हिमनद (ग्लेशियर) फट गया, जिससे लेंडे नदी में बर्फ और चट्टानों का मलबा तेजी से नीचे गिरा। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज ने भी पुष्टि की है कि बाढ़ से सात मिनट पहले भूकंप दर्ज किया गया था। प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों में भी नदी के सामान्य रास्ते के दोनों ओर बड़े पैमाने पर तबाही के निशान देखे गए हैं। भोटेकोशी नदी में मलबे वाली इस बाढ़ ने रसुवा और धादिंग जिलों में सबसे अधिक कहर बरपाया है।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान और प्रभावित क्षेत्र
इस प्रलयकारी बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। रसुवागढ़ी सीमा चौकी को जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह बह गई है। अधिकारियों के मुताबिक, कंक्रीट के 19 पुल पानी के तेज बहाव में जमींदोज हो गए हैं। इसके अलावा, नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू और पांच निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ का असर काठमांडू से 200 किलोमीटर दूर तक फैला है, जिसमें नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जैसे जिले शामिल हैं।
लापता लोगों का विवरण और रेस्क्यू ऑपरेशन
लापता 750 लोगों में से 265 चीन की तरफ के हैं, जबकि नेपाल में लापता भारतीयों में 37 लोग तमिलनाडु के रहने वाले हैं। ईशा फाउंडेशन के अनुसार, उनके केंद्र के 77 लोग लापता हैं, जो इमीग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे। वहीं, नेपाल और चीन के सुरक्षा बलों के 80 जवान भी लापता हैं। नेपाली सेना ने बचाव के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं, हालांकि खराब मौसम और मलबे के कारण रसुवा के स्याप्रु बेसी जैसे इलाकों में लैंडिंग में दिक्कत आ रही है। रणनीतिक विचारक ब्रह्मा चेलानी ने इस घटना को चीन द्वारा हिमालयी क्षेत्रों में बनाए जा रहे बड़े बांधों के खतरे से जोड़कर एक चेतावनी बताया है।
आपातकालीन संपर्क नंबर
नेपाल में भारतीय दूतावास: +977 9851316807, +977 9709107500 <br>बीजिंग में भारतीय दूतावास: 0086 18514284905 <br>नेपाल पर्यटन बोर्ड: 1234 (टोल फ्री), 1144 (हॉटलाइन) <br>उत्तर प्रदेश हेल्पलाइन: 1070