मंडी। हिमाचल प्रदेश सरकार प्रदेशवासियों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले नकली यानी एनालॉग पनीर को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की तैयारी में है। राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए सचिवालय भेज दिया है। प्रदेश की जनता को गंभीर बीमारियों से बचाने के उद्देश्य से यह कड़ा फैसला लिया जा रहा है। एनालॉग पनीर को सोयाबीन, रिफाइंड तेल और अन्य हानिकारक रसायनों के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक साबित हो सकता है।
बाजार में उपलब्ध इस पनीर को आम लोग अक्सर दूध से बना असली पनीर समझकर खरीद लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, इसके सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के साथ-साथ पाचन तंत्र से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएं होने का खतरा रहता है। उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसकी बिक्री पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है, और अब हिमाचल प्रदेश भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
सैकड़ों सैंपल फेल होने के बाद शुरू हुई कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में की गई औचक छापेमारी और सैंपलिंग के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। विभाग की जांच में एनालॉग पनीर के कई नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। अकेले मंडी जिले की बात करें तो यहाँ 20 से अधिक सैंपल पूरी तरह फेल पाए गए हैं।
जांच में यह भी पाया गया कि दुकानदार और निर्माता मुनाफे के चक्कर में ग्राहकों को गुमराह कर रहे हैं। असली पनीर की तुलना में एनालॉग पनीर काफी सस्ता होता है, जिससे लोग इसकी ओर आकर्षित होते हैं। मंडी में एक मामले में तो पैकेट के ऊपर ‘एनालाग’ शब्द इतने छोटे अक्षरों में लिखा गया था कि आम ग्राहक उसे देख ही न सके। यह कानूनन कार्रवाई से बचने और लोगों को भ्रमित करने का एक तरीका था।
पनीर की गुणवत्ता और स्वास्थ्य जोखिम
| एनालॉग पनीर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | विवरण |
| प्रमुख घटक | सोयाबीन, रिफाइंड तेल और अन्य वनस्पति वसा। |
| स्वास्थ्य पर प्रभाव | कैंसर का खतरा, हृदय रोग और मोटापा। |
| पहचान की समस्या | देखने और स्वाद में असली पनीर जैसा, जिससे भ्रम पैदा होता है। |
| बिक्री का कारण | असली पनीर से काफी सस्ता और अधिक मुनाफा। |
बाहरी राज्यों से होती है अवैध आपूर्ति
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में इस नकली पनीर की आपूर्ति पड़ोसी राज्यों से की जा रही है। मंडी जिले के जोगेंद्रनगर और आसपास के इलाकों में इसकी खेप पठानकोट से आती है। वहीं, सुंदरनगर, मंडी शहर, नेरचौक और सराज जैसे क्षेत्रों में कालका और अंबाला से आने वाली दूध और पनीर की गाड़ियों के माध्यम से इसे पहुंचाया जाता है।
इससे पहले विभाग की सिफारिशों के आधार पर मंडी और बिलासपुर जिलों में ‘कूललिप’ जैसे उत्पादों को भी प्रतिबंधित किया जा चुका है। अब पूरे प्रदेश स्तर पर एनालॉग पनीर को बंद करने की योजना है।
खाद्य सुरक्षा विभाग शिमला के कार्यकारी निदेशक जितेंद्र साजटा ने बताया कि एनालॉग पनीर पूरी तरह से सोयाबीन और वनस्पति सामग्री से तैयार होता है, जिसे लोग गलती से दूध का उत्पाद मान लेते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इसे प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए जाएंगे, जिसके बाद इसकी बिक्री करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।