चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई और उनके द्वारा भेजे गए पत्र पर की गई टिप्पणियों के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बिट्टू ने कहा है कि मुख्यमंत्री केवल ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ का राग अलापकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और जांच की संवैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार नहीं कर सकते।
भाजपा नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईडी द्वारा की जा रही कार्रवाई को केवल राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज करना गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि ये आरोप किसी साधारण व्यक्ति या किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी द्वारा हवा में नहीं उछाले गए हैं, बल्कि देश की एक प्रमुख और प्रतिष्ठित जांच एजेंसी द्वारा उठाए गए हैं। बिट्टू के अनुसार, यदि प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब पुलिस से किसी मामले में जानकारी मांगी है या सवाल किए हैं, तो यह मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि वे जांच में सहयोग सुनिश्चित करें।
जांच से भागना खड़े करता है बड़े सवाल
रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भी उनकी सरकार या उनके करीबियों के खिलाफ किसी घोटाले की परतें खुलती हैं, तो वे तुरंत इसे राजनीति से प्रेरित बता देते हैं। बिट्टू के अनुसार, बार-बार एक ही तरह का बचाव करना यह दर्शाता है कि सरकार के पास ठोस जवाबों की कमी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से संदेह और अधिक गहरा होता है कि पर्दे के पीछे कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि यदि उनकी सरकार के दामन पर कोई दाग नहीं है, तो उन्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। बिट्टू ने मांग की कि अगर लगाए जा रहे आरोप निराधार और झूठे हैं, तो सरकार को संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक कर देना चाहिए ताकि सच जनता के सामने आ सके।
जवाबदेही और संवैधानिक जिम्मेदारी
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री को उनके संवैधानिक पद की गरिमा और जिम्मेदारी की याद दिलाते हुए कहा कि जनता ने उन्हें राज्य की सेवा के लिए चुना है, न कि जांच एजेंसियों के काम में बाधा डालने के लिए। उन्होंने कहा कि भगवंत मान अक्सर दूसरों से जवाबदेही की मांग करते हैं, लेकिन जब बात उनकी अपनी जवाबदेही की आती है, तो वे पल्ला झाड़ने लगते हैं।
रवनीत सिंह बिट्टू के मुख्यमंत्री से प्रमुख सवाल
| प्रमुख बिंदु | बिट्टू का तर्क |
| जांच की स्वतंत्रता | जांच एजेंसियों को सबूतों और कानून के आधार पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने देना चाहिए। |
| पारदर्शिता | यदि आरोप गलत हैं, तो मुख्यमंत्री को तथ्यों को छिपाने के बजाय दस्तावेजों को जनता के बीच लाना चाहिए। |
| पद की गरिमा | मुख्यमंत्री का पद एक संवैधानिक जिम्मेदारी है, इसे किसी भी जांच से बचने के लिए ढाल नहीं बनाना चाहिए। |
| जनता की मांग | पंजाब की जनता अब खोखली बयानबाजी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर ठोस सफाई चाहती है। |
रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने बयान के अंत में दोहराया कि राजनीतिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को कानून से ऊपर नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भगवंत मान को लगता है कि आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं, तो उन्हें जांच को आगे बढ़ने देना चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल शोर मचाने से आधिकारिक जांच की दिशा नहीं बदली जा सकती और न ही इसे सवालों का विकल्प माना जा सकता है। सरकार को चाहिए कि वह जांच में पूरा सहयोग करे और कानून को अपना काम करने दे।
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