रेओ। इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप पर पिछले सप्ताह आए विनाशकारी भूकंप ने जनजीवन को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के कई दिन बीत जाने के बाद भी हजारों की संख्या में प्रभावित लोग बुनियादी सुविधाओं और मदद के लिए तड़प रहे हैं। भूकंप की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि घायलों का आंकड़ा 200 के पार पहुँच गया है। स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मदद पहुँचने में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
भूकंप के कारण सैकड़ों घर, स्कूल और व्यापारिक प्रतिष्ठान मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं। जो घर पूरी तरह नहीं गिरे हैं, उनमें भी दरारें आ गई हैं, जिससे वे रहने लायक नहीं रह गए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 5,000 लोगों को अपना घर-बार छोड़कर अस्थायी आश्रय स्थलों (शेल्टर होम) में शरण लेनी पड़ी है। इन आश्रयों में भी संसाधनों की कमी देखी जा रही है, जिसके चलते हजारों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
भूकंप और तबाही का लेखा-जोखा
| विवरण | प्रभावित संख्या |
| मृतकों की कुल संख्या | 68 |
| घायलों की संख्या | 213 |
| अस्थायी आश्रयों में रह रहे लोग | 5,000 |
| क्षतिग्रस्त इमारतें | सैकड़ों (सटीक आकलन जारी) |
आफ्टरशॉक्स का डर और तिरपाल के टेंट
फ्लोरेस द्वीप की सड़कों और मैदानों में इन दिनों तिरपाल के टेंटों का सैलाब नजर आ रहा है। हजारों लोग रात भर अपने ढहे हुए घरों के बाहर इन्हीं टेंटों में समय गुजार रहे हैं। लोगों के मन में दोबारा भूकंप आने (आफ्टरशॉक्स) का इतना गहरा खौफ है कि वे चोटिल होने के बावजूद बंद कमरों के भीतर जाने से कतरा रहे हैं। कड़ाके की ठंड और बारिश के बीच बच्चों और बुजुर्गों के लिए ये रातें और भी चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। प्रभावितों का कहना है कि उन्हें तुरंत भोजन, दवाइयों और साफ पानी की आवश्यकता है।
दुर्गम इलाकों तक पहुँचने की चुनौती
राहत और बचाव कार्यों में सबसे बड़ी बाधा क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा और भूस्खलन बना हुआ है। अधिकारियों ने जानकारी दी है कि रविवार देर रात राहतकर्मी भूकंप के केंद्र के सबसे करीब स्थित पालुए द्वीप पर पहुँचने में सफल रहे। कई दिनों तक यह इलाका पूरी दुनिया से कटा रहा। बचाव दल को यहाँ पहुँचने के लिए मलबे और भूस्खलन से प्रभावित पहाड़ी रास्तों से होकर बेहद जोखिम भरा सफर तय करना पड़ा। अलग-थलग पड़े इन गाँवों में पहुँचे राहतकर्मियों ने बताया कि वहाँ स्थिति और भी गंभीर है और निवासियों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता की सख्त जरूरत है।
स्वतंत्रता दिवस पर आपदा का साया
विडंबना यह रही कि जब पूरा इंडोनेशिया अपना 81वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब फ्लोरेस द्वीप के लोग अपनों को खोने का गम मना रहे थे। सोमवार को देश भर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोहों के बीच राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने देशवासियों को संबोधित किया। प्राबोवो सुबियांतो ने इस खुशी के अवसर पर भी फ्लोरेस के पीड़ितों को नहीं भुलाया और पूरे राष्ट्र से अपील की कि वे आपदा से प्रभावित लोगों की सलामती और उनकी रिकवरी के लिए प्रार्थना करें।
सरकारी स्तर पर अब प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण की योजना बनाई जा रही है, लेकिन वर्तमान में प्राथमिकता उन हजारों लोगों तक रसद पहुँचाने की है जो भूख और बीमारी के खतरे के बीच मदद की बाट जोह रहे हैं। आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं ताकि मलबे में दबे किसी भी संभावित जीवन को बचाया जा सके। आने वाले दिन फ्लोरेस द्वीप के निवासियों के लिए अत्यंत कठिन होने वाले हैं।
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